पर्वतारोहण की प्रासंगिता पर प्रकाश डालिए।
[2] आरोहण
Chapter: [2] आरोहण
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पर्वतारोहण पर्वतीय प्रदेशों की दिनचर्या है, वही दिनचर्या आज जीविका का माध्यम बन गई है। उसके गुण-दोष का विवेचन कीजिए।
[2] आरोहण
Chapter: [2] आरोहण
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आशय स्पष्ट कीजिए -
जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिलपित भेल॥
सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल॥
[8] विद्यापति : पद
Chapter: [8] विद्यापति : पद
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"मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई"‐ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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"मैंने निज दुर्बल ..... होड़ लगाई" इन पंक्तियों में 'दुर्बल पद बल' और 'हारी होड़' में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
श्रमित स्वप्न की मधुमाया ........... तान उठाई।
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
लौटा लो ...... लाज गँवाई।
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
[1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
Chapter: [1] जयशंकर प्रसाद : देवसेना का गीत, कार्नेलिया का गीत
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कंठ रुक रहा है, काल आ रहा है- यह भावना कवि के मन में क्यों आई?
[2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
Chapter: [2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
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'ठग-ठाकुरों' से कवि का संकेत किसकी ओर है?
[2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
Chapter: [2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
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'जल उठो फिर सींचने को' इस पंक्ति का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
[2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
Chapter: [2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
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प्रस्तुत कविता दुख और निराशा से लड़ने की शक्ति देती है? स्पष्ट कीजिए।
[2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
Chapter: [2] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति
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'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समिष्ट में विलय क्यों और कैसे संभव है?
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'- पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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'यह मधु है ....... तकता निर्भय'- पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' को क्या विशेषता हैं?
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह प्रकृत, स्वयंभू ......... शक्ति को दे दो।'
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक .......... चिर-अखंड अपनापा।'
[3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
Chapter: [3] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : यह दीप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
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