मराठी

Commerce (Hindi Medium) इयत्ता १२ - CBSE Question Bank Solutions

Advertisements
[object Object]
[object Object]
विषय
मुख्य विषय
अध्याय

Please select a subject first

Advertisements
Advertisements
< prev  1861 to 1880 of 6274  next > 

कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का प्रभाव विषय पर समूह में चर्चा कीजिए। चर्चा के दौरान उभरने वाले बिंदुओं को लिपिबद्ध कीजिए।

[1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
Chapter: [1.18] बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर : श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
Concept: undefined >> undefined

‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता हैं।

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

Advertisements

स्वय कविता रच लेने का आत्मविश्वास लखक के मन में कैस पैदा हुआ?

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

श्री सोंदलगकर के अध्यापन की उन विशषताओं को रेखांकित करें जिन्होंने कविताओं के प्रति लेखक के मन में रुचि जगाई। 

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

कविता के प्रति लगाव से पहल और उसके बाद अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा में क्या बदलाव आया?

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

आपके खयाल से पढ़ाई-लिखाई के सबध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लखक के पिता का? तर्क सहित उत्तर दें।

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

दत्ता जी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए लेखक और उसकी माँ को एक झूठ का सहारा लेना पड़ा। यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता तो आगे का घटनाक्रम क्या होता?

[2.2] जूझ
Chapter: [2.2] जूझ
Concept: undefined >> undefined

सिंधु-सभ्यता साधन-सपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडबर नहीं था। कैसे?

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

“सिंधु-सभ्यता की खूबी उसका सौंदर्य-बोध हैं जो राज-पोषित या धर्म-पोषित न होकर समाज-पोषित था।” ऐसा क्यों कहा गया? 

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

पुरातत्व के किन चिहनों के आधार पर आप यह कह सकते हैं कि- “सिंधु-सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी?”

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

‘यह सच है कि यहाँ किसी अगन की टूटी-फूटी सीढ़ियाँ अब आपको कहीं नहीं ले जातीं; वे आकाश की तरफ अधूरी रह जाती हैं। लेकिन उन अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप दुनिया की छत पर हैं, वहाँ से आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रह हैं।” इस कथन के पीछ लखक का क्या आशय हैं?

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

‘टूटे-फूटे खडहर, सभ्यता और सस्कृति के इतिहास के साथ-साथ धड़कती जिंदगियों के अनछुए समयों का भी दस्तावेज होते हैं।”-इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

इस पाठ में एक ऐसे स्थान का वर्णन हैं जिसे बहुत कम लोगों ने देखा होगा, परंतु इससे आपके मन में उस नगर की एक तसवीर बनती है। किसी ऐस ऐतिहासिक स्थल, जिसको आपने नजदीक से देखा हो, का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

नदी, कुएँ स्नानागार और बेजोड़ निकासी व्यवस्था को देखते हुए लखक पाठकों स प्रश्न पूछता है कि क्या हम सिंधु घाटी सभ्यता को जल-सस्कृति कह सकते हैं? आपका जवाब लखक के पक्ष में है या विपक्ष में? तक दें।

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

सिंधु घाटी सभ्यता का कोई लिखित साक्ष्य नहीं मिला है। सिर्फ अवशेषों के आधार पर ही धारणा बनाई गई है। इस लेख में मुअनजो-दड़ो के बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है क्या आपके मन में इससे कोई भिन्न धारणा या भाव भी पैदा होता है? इन सभावनाओं पर कक्षा में समूह-चर्चा करें।

[2.3] अतीत में दबे पाँव
Chapter: [2.3] अतीत में दबे पाँव
Concept: undefined >> undefined

‘यह साठ लाख लोगों की तरफ से बोलने वाली एक आवाज हैं। एक ऐसी आवाज, जो नहीं, बल्कि एक साधारण लड़की की हैं।” इल्या इहरनबुर्ग की इस टिप्पणी के सदर्भ में पठित अशों पर विचार करें।

[2.4] डायरी के पन्ने
Chapter: [2.4] डायरी के पन्ने
Concept: undefined >> undefined

‘काश, कोई तो होता जो मेरी भावनाओं को गभीरता से समझ पाता। अफसोस, ऐसा व्यक्ति मुझे अब तक नहीं मिला। ” क्या आपको लगता है कि ऐन के इस कथन में उसके डायरी-लेखन का कारण छिपा हैं?

[2.4] डायरी के पन्ने
Chapter: [2.4] डायरी के पन्ने
Concept: undefined >> undefined

‘प्रकृति-प्रदत्त प्रजनन-शक्ति के उपयोग का अधिकार बच्चे पैदा करें या न करें अथवा कितने बच्चे पैदा करें-इस की स्वतत्रता स्त्री सी छीनकर हमारी विश्व-व्यवस्था न न सिर्फ स्त्री की व्यक्तित्व-विकास के अनक अवसरों से वचित किया है बल्कि जनाधिक्य की समस्या भी पैदा की हैं।’ ऐन की डायरी के 13 जून, 1944 के अश में व्यक्त विचारों के सदर्भ में इस कथन का औचित्य ढूंढ़े।

[2.4] डायरी के पन्ने
Chapter: [2.4] डायरी के पन्ने
Concept: undefined >> undefined

“ऐन  की डायरी अगर एक एतिहासिक शेर का जीवत दस्तावेज है, तरे साथ ही उसके निजी सुख-दुख और भावनात्मक उथलपुथल का र्भा। इन मुष्ठा’ में दानी’ का फ़र्क मिट गया तो ” हस कथन पर विचार करतै हुए अपनी सहमति या असहमति तर्कपूवंक व्यक्त करों।

[2.4] डायरी के पन्ने
Chapter: [2.4] डायरी के पन्ने
Concept: undefined >> undefined

ऐन ने अपनी डायरी ‘किट्टी’ (एक निजीव गुड़िया) को सबोधित चिट्ठी की शक्ल में लिखने की जरूरत क्यों महसूस की होगी?

[2.4] डायरी के पन्ने
Chapter: [2.4] डायरी के पन्ने
Concept: undefined >> undefined
< prev  1861 to 1880 of 6274  next > 
Advertisements
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×