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निम्नलिखित में से कर्तृवाच्य का उदाहरण है -
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निम्नलिखित वाक्यों में भाववाच्य का वाक्य है -
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"मैं यह भाषा नहीं पढ़ सकूँगा" - वाक्य को कर्मवाच्य में बदलने पर होगा -
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स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को सुमेलित करके उचित विकल्प चुनकर लिखिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | कर्तृवाच्य | (अ) | पक्षियों से उड़ा जाता है। |
| (II) | कर्मवाच्य | (ब) | पुलिस द्वारा चोर पकड़ा गया। |
| (III) | भाववाच्य | (स) | चलो, यहाँ से चलें। |
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आपका नाम सुनीता/सुरेश है। आप राजेन्द्र नगर के निवासी हैं। पिछले कुछ दिनों से आपके क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति अव्यवस्थित है। अपने क्षेत्र में अनियमित विद्युत आपूर्ति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य विद्युत आपूर्ति निगम के महानिदेशक के नाम लगभग 80 शब्दों में एक शिकायती ई-मेल लिखिए।
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आपके घर मेहमान आने वाले हैं तो आपने 'तुरत-फुरत' नामक वेबसाइट से कुछ खाने-पीने की वस्तुएँ मँगवाई हैं। बीस मिनट में सामान पहुँचाने वाली इस साइट से 50 मिनट में भी सामान नहीं आया है। इसकी शिकायत करते हुए उपभोक्ता संपर्क विभाग को लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल लिखिए। आपका नाम साधना/सोमेश है।
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निम्नलिखित में कर्मवाच्य का उदाहरण है -
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'मोहम्मद रफी द्वारा यह गीत गाया गया' - इसे कर्तृवाच्य में बदलने पर होगा -
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निम्नलिखित में से कर्मवाच्य के उदाहरण में किसे नहीं माना जाएगा?
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निम्नलिखित वाक्यों में से कर्तृवाच्य का उदाहरण है -
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आप कोल्हापुर, महाराष्ट्र के निवासी मिलिंद/भुवी हैं। आपके एक परिचित ने आपको दिल्ली से एक पार्सल भेजा जो 25 दिनों बाद भी नहीं मिला। आप कोरियर कंपनी को ई-मेल लिखकर शिकायत करते हुए उचित कार्यवाही करने की चेतावनी दीजिए।
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आप बतौर अध्यापक कार्यरत हैं लेकिन आप किसी कारण से अब अपना व्यवसाय बदलना चाहते है। नौकरी से त्यागपत्र देते हुए विद्यालय प्रमुख को 80 शब्दों में ई-मेल लिखिए। आपका नाम प्रेरणा/प्रतीक है।
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"अर्थ बिना कब पूर्ण हैं, शब्द, सकल जग-काज।
अर्थ अगर आ जाए तो, ठाठ-बाट औ राज।।"
इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है-
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"कैसे कलुषित प्राण हो गए।
मानो मन पाषाण हो गए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
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"इधर उठाया धनुष क्रोध में और चढ़ाया उस पर बाण।
धरा, सिंधु, नभ कॉँपे सहसा, विकल हुए जीवों के प्राण।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
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"एक दिवस सूरज ने सोची, छुट्टी ले लेने की बात।
सोचा कुछ पल सुकूँ मिलेगा, चलने दो धरती पर रात।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
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"कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए।
हिमकणों से पूर्ण मानो हो गए पंकज नए।।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-
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“मंगन को देखि पट देत बार-बार है।” इस पंक्ति में निहित अलंकार है -
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“सो जनु हमरेहि माथें काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।” इस चौपाई में प्रयुक्त अलंकार है -
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“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
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