लेखिका ने कौन-कौन से उपन्यास पढ़े? उन उपन्यासों पर उसकी क्या प्रतिक्रिया रही?
[10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
Chapter: [10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
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प्रिंसिपल के बुलावे पर लेखिका के पिता कॉलेज नहीं जाना चाहते थे पर वहाँ ऐसा क्या हुआ कि वे खुश होकर लौटे?
[10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
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देश की राजनैतिक गतिविधियों में युवा वर्ग अपना योगदान किस तरह दे रहा था?
[10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
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वर्ष 1947 में लेखिका को कौन-कौन सी खुशियाँ मिलीं? उसे कौन-सी खुशी सबसे महत्त्वपूर्ण लगी और क्यों?
[10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
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‘एक कहानी यह भी’ पाठ का प्रतिपाद्य लिखिए।
[10] मन्नू भंडारी : एक कहानी यह भी
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कुछ पुरातन पंथी लोग स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी थे। द्विवेदी जी ने क्या-क्या तर्क देकर स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया?
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
Chapter: [1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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'स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होते हैं' - कुतर्कवादियों की इस दलील का खंडन द्विवेदी जी ने कैसे किया है, अपने शब्दों में लिखिए।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोघी कुतर्कों का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है - जैसे 'यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़तीं, न वे पूजनीय पुरूषों का मुकाबला करतीं।' आप ऐसे अन्य अंशों को निबंध में से छाँटकर समझिए और लिखिए।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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पुराने समय में स्त्रियों द्वारा प्राकृत भाषा में बोलना क्या उनके अपढ़ होने का सबूत है - पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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परंपरा के उन्हीं पक्षों को स्वीकार किया जाना चाहिए जो स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ाते हों-तर्क सहित उत्तर दीजिए।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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तब की शिक्षा प्रणाली और अब की शिक्षा प्रणाली में क्या अंतर है? स्पष्ट करें।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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महावीरप्रसाद द्विवेदी का निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है, कैसे?
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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द्विवेदी जी की भाषा-शैली पर एक अनुच्छेद लिखिए।
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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लेखक स्त्री-शिक्षा विरोधियों की किस सोच पर दुख प्रकट करता है?
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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स्त्री-शिक्षा के विरोधी अपनी बात के समर्थन में क्या-क्या तर्क देते हैं?
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लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अपढ़ होने का प्रमाण क्यों नहीं मानता है?
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लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अपढ़ होने का प्रमाण क्यों नहीं मानता है?
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‘हिंदी, बाँग्ला आजकल की प्राकृत हैं’ ऐसा कहकर लेखक ने क्या सिद्ध करना चाहा है?
[1.15] महावीरप्रसाद द्विवेदी : स्त्री-शिक्षा के विरोधी और कुतर्कों का खंडन
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लेखक ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों पर व्यंग्य करते हुए कहा है, इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता की बलिहारी! इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता को स्पष्ट कीजिए।
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प्राचीन भारत की किन्हीं दो विदुषी स्त्रियों का नामोल्लेख करते हुए यह भी बताइए कि उस समय स्त्रियों को कौन कौन-सी कलाएँ सीखने की अनुमति थी?
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