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योग्यं क्रियापदं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत उत्तरम्:
त्वं द्रष्टुं ______।
Concept: युग्ममाला।
समानार्थकशब्दान् लिखत।
कनकम् - ______।
Concept: युग्ममाला।
पद्यांशं पटित्वा निर्दिष्टा: कृतीः कुरुत। (5 तः 4)
|
यथा चतुर्भि: कनकं प्रीध्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनै:। अवं न भक्तो न च पूजको वा। वात्मीकिव्यासवाणाद्या: प्राचीना: कविषण्डिता:। घटं भिन्द्यात् पटं छिन्यात् कुर्याद्रासभरोहणम्। |
(क) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत। 1
पुरुषपरीक्षा कथं भवति?
(ख) विशेषण-विशेष्ययो: मेलनं कुरुत। 1
| विशेषणम् | विशेष्यम् | |
| (1) | प्राचीनाः | पुरुषः |
| (2) | प्रसिद्धः | कविपण्डिता: |
| घटम् |
(ग) जालरेखाचित्रं पूरयत। 1

(घ) पद्यांशात् २ द्वितीया-विभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत। 1
(च) पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत । 1
- तथापि = तथा + ______ ।
- कुर्याद्रासभरोहणम् = ______ + रासभरोहणम् ।
Concept: युग्ममाला।
उचितं पर्यायं चित्वा वाक्यं पुनर्लिखत।
भवान् ______।
Concept: अभ्यासपत्रम् - २।
गद्यांशं पठित्वा सरलार्थं लिखत।
| वैखानसः | (राजानम् अवरुध्य) राजन् ! आश्रममृगोऽयं, न हन्तव्यः, न हन्तव्यः। आशु प्रतिसंहर सायकम्। राज्ञां शस्त्रम् आर्तत्राणाय भवति न तु अनागसि प्रहर्तुम्। |
| दुष्यन्तः | प्रतिसंहृत एष: सायक:। (यथोक्तं करोति) |
Concept: संस्कृतनाट्ययुग्मम्।
गद्यांशं पठित्वा सरलार्थं लिखत।
| वैखानस: | राजन्! समिदाहरणाय प्रस्थिता वयम्। एष खलु कण्वस्य कुलपते: अनुमालिनीतीरमाश्रमो दृश्यते। प्रविश्य प्रतिगृह्यताम् आतिथेय: सत्कार:। |
| दुष्यन्तः | तपोवननिवासिनामुपरोधो मा भूत्। अत्रैव रथं स्थापय यावदवतरामि। |
Concept: संस्कृतनाट्ययुग्मम्।
विरुद्धार्थकशब्दान् लिखत।
सद्गुणः × ......।
Concept: वाचनप्रशंसा।
विरुद्धार्थकशब्दान् लिखत।
प्राचीनाः × .......।
Concept: वाचनप्रशंसा।
समाससविग्रहमणां समासनामाभिः सह मेलनं करुत
| समासविग्रहः | समासनाम | ||
| (1) | विविधानि बीजानि | (अ) | नञ्-तत्पुरुषः। |
| (2) | दिने दिने | (आ) | बहुब्रीहिः। |
| (3) | लगुडं हस्ते यस्य सः | (इ) | कर्मधारयः। |
| (4) | न इच्छा | (ई) | इतरेतर द्वन्द्व :। |
| (5) | चिन्ताया मग्ना | (उ) | अव्ययीभाव:। |
| (6) | कवयः च पण्डिताः च | (ऊ) | सप्तमी-तत्परुषः। |
Concept: समासा:।
समासानां तालिकापूर्ति कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रह: | समासनाम |
| सकोपम् | कोपेन सह | ......... |
Concept: समासा:।
समासविग्रहाणां समासनामभिः सह मेलनं कुरुत।
| समासविग्रहः | समासनाम |
| किञ्चित् जानाति इति। | षष्ठी - तत्पुरुषः। |
| जलस्य व्यवस्थापनम्। | कर्मधारयः। |
| लगुडः हस्ते यस्य सः। | उपपद - तत्पुरुषः। |
| कवयः च पण्डिताः च। | अव्ययीभावः। |
| अहनि अहनि। | बहुव्रीहिः। |
| मानवता एव धर्मः। | इतरेतर-द्वन्द्वः। |
Concept: समासा:।
समासविग्रहाणां समासनामभि: सह मेलनं कुरुत।
| समासविग्रह: | समासनाम |
| रामस्य अभिषेकः। | इतेतर् द्वन्द्व:। |
| न शक्यम्। | कर्मधारयः। |
| मृगः च शृगाल: च। | षष्ठी तत्पुरुष:। |
| सद्गुणा: एव सत्ति:। | अव्ययीभाव:। |
| महान् भागः यस्य स:। | नञ्-तत्पुरुष:। |
| क्रमम् अनुसृत्य। | बहुव्रीहिः। |
Concept: समासा:।
समानार्थकशब्दान् चित्वा लिखत।
नक्र: - ______।
Concept: आदिशक्ङराचार्य:
गद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टा: कृती: कुरुत।
|
एकस्मिन् दिने शङ्करः स्नानार्थ पूर्णानदीं गत:। यदा स: स्नाने मग्न: तदा तत्र एक: नक्र: आगत:। नक्र: इटिति तस्य पादम् अगृहात्। तदा शङ्क: उच्चै: आक्रोशत्। “अम्ब! त्रायस्व। नक्रात् त्रायस्व!” आक्रोशं श्रुत्वा नदीतीरं प्राप्ता आर्याम्बा पुत्रं नक्रेण गृहीतमपश्यत्। भयाकुला सा अपि रोदनम् आरभत। शङ्कर: मातरम् आर्ततया प्रार्थयत - “अम्ब, इतः परम् अहं न जीवामि। मरणात् पूर्वं संन्यासी भवितुम् इच्छामि। अधुना वा देहि अनुमतिम्। " चेतसा अनिच्छन्ती अपि विवशा माता अवदत् - “वत्स, यथा तुभ्यं रोचते तथैव भवतु। इदानीमेव संन्यासं स्वीकुरु। मम अनुमति: अस्ति” इति। तत्क्षणमेव आश्चर्यं घटितम्। दैववशात् शङ्कर: नक्राद् मुक्त:। स नदीतीरम् आगत्य मातु: चरणौ प्राणमत्। अनन्तरं शङ्कर: मातरं संन्यासस्य महत्वम् अवाबोधयत्। संन्यासी न केवलम् एकस्या: पत्र:। विशालं जगद् एव तस्य गृहम्। 'मात:, यदा त्वं स्मरिष्यसि तदा एव त्वत्समीपमागमिष्यामि इति मात्रे प्रतिश्रुत्य स: गृहात् निरगच्छत्। तत: गोविन्दभगवत्पादानां शिष्यो भूत्वा स: सर्वाणि दर्शनानि अपठत्। तेभ्य: संन्यासदीक्षां गृहीत्वा वैदिकधर्मस्य स्थापनार्थं प्रस्थानम् अकरोत्। अष्टवर्षे चतुर्वेदी द्वादशे सर्वशा स्त्रवित। |
(1) अवबोधनम्। (3 तः 2) 2
(क) कः कं वदति? 1
“इदानीमेव संन्यासं स्वीकुरु।"
(ख) वाक्यं पुनर्लिखित्वा सत्यम्/असत्यम् इति लिखत। 1
“एकस्मिन् दिने शङ्करः स्नानार्थं शरयूनदीं गत:।
(ग) एषः गद्यांश: कस्मात् पाठात् उद्धृत:? 1
(2) शब्दज्ञानम्। (3 तः 2) 2
(क) गद्यांशात् 2 सप्तमीविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत। 1
(ख) गद्यांशात् विशेषण-विशेष्ययो: मेलनं कुरुत। 1
| 'अ' | 'आ' | |
| (1) | गृहीतम् | माता |
| (2) | विवशा | पुत्रम् |
| दर्शनानि |
(ग) पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत। 1
(1) तत्क्षणमेव = तत्क्षणम् + ______।
(2) गृहीतमपश्यत् = ______ + अपश्यत्।
Concept: आदिशक्ङराचार्य:
सर्वनामतालिका पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| ...... | आवाभ्याम् | ...... | पञ्चमी |
Concept: अभ्यासपत्रम् - ३।
सर्वनामतालिका पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| इयम् | ...... | ...... | प्रथम |
Concept: अभ्यासपत्रम् - ३।
योग्यं पर्यायं चिनुत।
बालकः अन्यशाशत्राणि अधीतवान्।
Concept: धातुसधित-विशेषणानि।
पद्यांश॑ निर्दिष्टा: कृती: कुरुत। (5 त: 4)
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वैद्यराज नमस्तुभ्यं यमराजसहोदर । मनुजा वाचनेनैव बोधन्ते विषयान् बहून् । यादृशं वपते बीजं क्षेत्रमासाद्य कर्षकः। विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। |
(क) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।
यमः किं हरति?
(ख) विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत।
| विशेषणम् | विशेष्यम् | |
| (1) | दक्षाः | विषयान् |
| (2) | बहून् | वाचनम् |
| मनुजाः |
(ग) जालरेखाचित्रं पूरयत।
| विद्या | प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। |
| गुरूणां ______। | |
| परं दैवतम्। | |
| नरस्य अधिकं ______। |
(घ) पद्यांशात् 2 द्वितीयाविभक्त्यन्तपदे चित्वा लिखत।
(च) पूर्वपदं/उत्तरपदं लिखत।
- वाचनेनैव =______ + एव।
- क्षेत्रमासाद्य = क्षेत्रम् +______।
Concept: चित्रकाव्यम्।
समानार्थकं पदं लिखत।
सुता = ......।
Concept: चित्रकाव्यम्।
माध्यमभाषया उत्तरं लिखत।
कदा मानवता भवेत्?
Concept: मानवताधर्मः।
