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Science (Hindi Medium) इयत्ता १२ - CBSE Important Questions

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दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

डिजिटल युग और मैं

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Chapter: [5] लेखन कौशल्य
Concept: उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)

दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

परीक्षा तनाव के कारण व इसे रोकने के उपाये

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Chapter: [5] लेखन कौशल्य
Concept: उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)

दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

उच्च शिक्षा हेतु छात्रों का विदेशों को पलायन

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Chapter: [5] लेखन कौशल्य
Concept: उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए।

       उपवास और संयम ये आत्महत्या के साधन नहीं हैं। भोजन का असली स्वाद उसी को मिलता है जो कुछ दिन बिना खाए भी रह सकता है। ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’, जीवन का भोग त्याग के साथ करो, यह केवल परमार्थ का ही उपदेश नहीं है, क्योंकि संयम से भोग करने पर जीवन में जो आनंद प्राप्त होता है, वह निरा भोगी बनकर भोगने से नहीं मिल पाता ज़िंदगी की दो सूरतें हैं। एक तो यह कि आदमी बड़े-से-बड़े मकसद के लिए कोशिश करे, जगमगाती हुई जीत पर पंजा डालने के लिए हाथ बढ़ाए, और अगर असफलताएँ कदम-कदम पर जोश की रोशनी के साथ अंधियाली का जाल बुन रही हों, तब भी वह पीछे को पाँव न हटाए। दूसरी सूरत यह है कि उन गरीब आत्माओं का हमजोली बन जाए जो न तो बहुत अधिक सुख पाती हैं और न जिन्हें बहुत अधिक दुख पाने का ही संयोग है, क्योंकि वे आत्माएँ ऐसी गोधूलि में बसती हैं जहाँ न तो जीत हँसती है और न कभी हार के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ती है। इस गोधूलि वाली दुनिया के लोग बंधे हुए घाट का पानी पीते हैं, वे ज़िंदगी के साथ जुआ नहीं खेल सकते। और कौन कहता है कि पूरी ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने में कोई आनंद नहीं है?

       जनमत की उपेक्षा करके जीने वाला आदमी दुनिया की असली ताकत होता है और मनुष्यता को प्रकाश भी उसी आदमी से मिलता है। ज़िंदगी से, अंत में, हम उतना ही पाते हैं जितनी कि उसमे पूँजी लगाते हैं। यह पूँजी लगाना ज़िंदगी के संकटों का सामना करना है, उसके उस पन्ने को उलट कर पढ़ना है जिसके सभी अक्षर फूलों से ही नहीं, कुछ अंगारों से भी लिखे गए हैं। ज़िंदगी का भेद कुछ उसे ही मालूम है जो यह जानकार चलता है की ज़िंदगी कभी भी ख़त्म न होने वाली चीज़ है।

       अरे! ओ जीवन के साधकों! अगर किनारे की मरी सीपियों से ही तुम्हें संतोष हो जाए तो समुद्र के अंतराल में छिपे हुए मौक्तिक - कोष को कौन बाहर लाएगा? दुनिया में जितने भी मज़े बिखेरे गए हैं उनमें तुम्हारा भी हिस्सा है। वह चीज़ भी तुम्हारी हो सकती है जिसे तुम अपनी पहुँच के परे मान कर लौटे जा रहे हो। कामना का अंचल छोटा मत करो, ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है।

(i) ‘त्यक्तेन भुंजीथा:’ कथन से लेखक के व्यक्तित्व की किस विशेषता का बोध होता है? (1)

(क) परिवर्जन
(ख) परिवर्तन
(ग) परावर्तन
(घ) प्रत्यावर्तन

(ii) मंज़िल पर पहुँचने का सच्चा आनंद उसे मिलता है, जिसने उसे - (1)

(क) आन की आन में प्राप्त कर लिया हो
(ख) पाने के लिए भरसक प्रयास किया हो
(ग) हाथ बढ़ा कर मिट्ठी में कर लिया हो
(घ) सच्चाई से अपने सपनों में बसा लिया हो

(iii) ‘गोधूलि’ शब्द का तात्पर्य है - (1)

(क) गोधेनु
(ख) संध्यावेला
(ग) गगन धूलि
(घ) गोद ली कन्या

(iv) ‘गोधूलि’ वाली दुनिया के लोगों से अभिप्राय है - (1)

(क) विवशता और अभाव में जीने वाले
(ख) जीवन को दाँव पर लगाने वाले
(ग) गायों के खुरों से धूलि उड़ाने वाले
(घ) क्षितिज में लालिमा फैलाने वाले

(v) जीवन में असफलताएँ मिलने पर भी साहसी मनुष्य क्या करता है? (1)

(क) बिना डरे आगे बढ़ता है क्योंकि डर के आगे जीत है
(ख) पराजय से निपटने के लिए फूँक-फूँककर कदम आगे रखता है
(ग) अपने मित्र बंधुओं से सलाह और मदद के विषय में विचार करता है
(घ) असफलता का कारण ढूँढकर पुनः आगे बढ़ने का प्रयास करता है

(vi) आप कैसे पहचानेंगे कि कोई व्यक्ति साहस की ज़िंदगी जी रहा है? (1)

(क) जनमत की परवाह करने वाला
(ख) निडर और निशंक जीने वाला
(ग) शत्रु के छक्के छुड़ाने वाला
(घ) भागीरथी प्रयत्न करने वाला

(vii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(II) मनुष्य अपने दृढ़ मंतव्य व कठिन परिश्रम से सर्वोच्च प्राप्ति की ओर अग्रसर रहता है।

(III) विपत्ति सदैव समर्थ के समक्ष ही आती है, जिससे वह पार उतर सके।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(viii) ‘ज़िंदगी को दाँव पर लगा देने’ में कोई आनंद नहीं है? लेखक इससे सिद्ध करना चाहते हैं कि ज़िंदगी - (1)

(क) रंगमंच के कलाकारों के समान व्यतीत करनी चाहिए।
(ख) में सकारात्मक परिस्थितियाँ ही आनंद प्रदान करती हैं।
(ग) में प्रतिकूलता का अनुभव जीवनोपयोगी होता है।
(घ) केवल दुखद स्थितियों का सामना करवाती है।

(ix) किन व्यक्तियों को सुख का स्वाद अधिक मिलता है? (1)

(क) जो अत्यधिक सुख प्राप्त करते हैं
(ख) जो सुख-दुख से दूर होते हैं
(ग) जो पहले दुख झेलते हैं
(घ) जो सुख को अन्य लोगों से साझा करते हैं

(x) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1) 

कथन (A): ‘ज़िंदगी के फल को दोनों हाथों से दबाकर निचोड़ो, रस की निर्झरी तुम्हारे बहाए भी बह सकती है’।

कारण (R): ज़िंदगी रूपी फल का रसास्वादन करने के लिए दोनों हाथों से श्रम करना होगा।

(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(घ) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।

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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।

चिड़िया को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बड़ी है, निर्मम है,
वहाँ हवा में उसे
बाहर जाने का टोटा है
यहाँ चुग्गा मोटा है।
बाहर बहेलिये का डर है
यहाँ निर्भय कंठ स्वर है।
फिर भी चिड़िया मुक्ति का गाना गाएगी,
अपने जिस्म की गंध तक नहीं मिलेगी।

यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहाँ कटोरी में भरा जल गटकना है।
मारे जाने की आशंका से भरे होने पर भी
पिंजड़े से जितना अंग निकल सकेगा निकालेगी,
हर सू ज़ोर लगाएगी,
और पिंजरा टूट जाने या खुल जाने पर उड़ जाएगी।

(i) पिंजड़े के भीतर चिड़िया को क्या-क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं? (1)

(क) खाने की स्वतंत्रता, सम्मान और स्नेह
(ख) नीर, कनक, आवास और सुरक्षा
(ग) प्यार, पुरस्कार, भोजन और हवा
(घ) निश्चितता, निर्भयता, नियम और नीरसता

(ii) बाहर सुखों का अभाव और प्राणों का संकट होने पर भी चिड़िया मुक्ति ही क्यों चाहती है? (1)

(क) वह अपने परिवार से मिलना चाहती है।
(ख) वह आज़ाद जीवन जीना पसंद करती है।
(ग) वह जीवन से मुक्ति चाहती है।
(घ) वह लंबी उड़ान भरना चाहती है।

(iii) चिड़िया के समक्ष धरती को निर्मम बताने का मंतव्य है - (1)

(क) भयावह स्थिति उत्पन्न करना
(ख) छोटे जीव के प्रति दया भाव
(ग) बहेलिये से बचाव की प्रेरणा
(घ) जीवनोपयोगी वस्तुएँ जुटाने का संघर्ष दर्शाना

(iv) पद्यांश का मूल प्रतिपाद्य क्या है? (1)

(क) पिंजरे में रखने वालों को सही राह दिखाना
(ख) पिंजरे के भीतर और बाहर की दुनिया दिखाना
(ग) पिंजरे के पक्षी की उड़ान और दर्द से परिचित कराना
(घ) पिंजरे के पक्षी के माध्यम से स्वतंत्रता का महत्त्व बताना

(v) कवि के संबंध में इनमें से सही है कि वह - (1)

(क) प्रकृति के प्रति सचेत हैं
(ख) चिड़िया की सुरक्षा चाहते हैं
(ग) आज़ादी के समर्थक हैं
(घ) अन्न-जल की उपयोगिता बताते हैं

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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित पद्यांश

निम्नलिखित पद्यांश से संबंधित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प-चयन द्वारा दीजिए।

हैं जन्म लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही-सी चाँदनी है डालता।

मेह उन पर है बरसता एक-सा,
एक सी उन पर हवाएँ हैं बहीं
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं।

छेदकर काँटा किसी की उंगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर वसन
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भैंवर का है भेद देता श्याम तन।

फूल लेकर तितलियों को गोद में
भँवर को अपना अनूठा रस पिला,
निज सुगंधों और निराले ढंग से
है सदा देता कली का जी खिला।

है खटकता एक सबकी आँख में
दूसरा है सोहता सुर शीश पर,
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।

(i) प्रस्तुत काव्यांश किससे संबंधित है? (1)

(क) फूल और तितलियों से
(ख) फल और पौधे से
(ग) पौधे और चाँदनी से
(घ) बड़प्पन की पहचान से

(ii) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

(I) सद्गुणों के कारण ही मानुस प्रेम का पात्र बनता है।
(II) परिवेशगत समानता सदैव अव्यवस्था को जन्म देती है।
(III) भौगोलिक परिस्थितियाँ प्राकृतिक भिन्नता का कारण हैं।

उपरिलिखित कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

(क) केवल I
(ख) केवल III
(ग) I और II
(घ) II और III

(iii) इस काव्यांश से हमें क्या सीख मिलती है? (1)

(क) मनुष्य के कर्म उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं।
(ख) समान परिवेश में रहते हुए मनुष्य समान आदर पाते हैं।
(ग) किसी भी कुल में जन्म लेने से ही मनुष्य बड़ा हो सकता है।
(घ) समान पालन-पोषण होने पर अलग व्यक्तियों के स्वभाव समान होते हैं।

(iv) ‘फाड़ देता है किसी का वर वसन’ में ‘वसन’ शब्द का अर्थ है - (1)

(क) व्यसन
(ख) वस्त्र
(ग) वास
(घ) वासना

(v) कवितानुसार फूल निम्न में से कौन-सा कार्य नहीं करता? (1)

(क) भँवरों को अपना रस पिलाता है।
(ख) तितलियों को अपनी गोद में खिलाता है।
(ग) फल बनकर पशु-पक्षियों और मनुष्यों का पेट भरता है।
(घ) सुरों के शीश पर सोहता है।

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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित पद्यांश

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:-

पश्चिमी सभ्यता मुख मोड़ रही है। वह एक नया आदर्श देख रही है। अब उसकी चाल बदलने लगी है। वह कलों की पूजा को छोड़कर मनुष्यों की पूजा को अपना आदर्श बना रही है। इस आदर्श के दर्शाने वाले देवता रस्किन और टालस्टॉय आदि हैं। पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है। वहाँ के गंभीर विचार वाले लोग इस प्रभात का स्वागत करने के लिए उठ खड़े हुए हैं। प्रभात होने के पूर्व ही उसका अनुभव कर लेने वाले पक्षियों की तरह इन महात्माओं को इस नए प्रभात का पूर्व ज्ञान हुआ है और हो क्यों न? इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के भाई-बहन ही नहीं, उनकी सारी जाति पिस गई, उनके जीवन के धुरे टूट गए, उनका समस्त धन घरों से निकलकर एक-दो स्थानों में एकत्र हो गया।

साधारण लोग मर रहे हैं, मज़दूरों के हाथ-पाँव फट रहे हैं, लहू बह रहा है! सर्दी से ठिठुर रहे हैं। एक तरफ दरिद्रता का अखंड राज्य है, दूसरी तरफ अमीरी का चरम दृश्य। परंतु अमीरी भी मानसिक दुखों से विमर्दित है। मशीनें बनाई तो गई थीं मनुष्यों का पेट भरने के लिए - मज़दूरों को सुख देने के लिए - परंतु वे काली-काली मशीनें ही काली बनकर उन्हीं मनुष्यों का भक्षण कर जाने के लिए मुख खोल रही हैं। प्रभात होने पर ये काली-काली बलाएँ टूर होंगी। मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय होगा।

शोक का विषय यह है कि हमारे और अन्य पूर्वी देशों में लोगों को मज़दूरी से तो लेशमात्र भी प्रेम नहीं है, पर वे तैयारी कर रहे हैं पूर्वोक्त काली मशीनों का आलिंगन करने की। पश्चिम वालों के तो ये गले पड़ी हुई बहती नदी की काली कमली हो रही हैं। वे छोड़ना चाहते हैं, परंतु काली कमली उन्हें नहीं छोड़ती। देखेंगे पूर्व वाले इस कमली को छाती से लगाकर कितना आनंद अनुभव करते हैं। यदि हम में से हर आदमी अपनी दस उँगलियों की सहायता से साहसपूर्वक अच्छी तरह काम करे तो हम मशीनों की कृपा से बढ़े हुए परिश्रम वालों को वाणिज्य के जातीय संग्राम में सहज ही पछाड़ सकते हैं। सूर्य तो सदा पूर्व ही से पश्चिम की ओर जाता है। पर आओ पश्चिम से आनेवाली सभ्यता के नए प्रभात को हम पूर्व से भेजें।

इंजनों की वह मज़दूरी किस काम की जो बच्चों, स्त्रियों और कारीगरों को ही भूखा नंगा रखती है और केवल सोने, चाँदी, लोहे आदि धातुओं का ही पालन करती है। पश्चिम को विदित हो चुका है कि इनसे मनुष्य का दुख दिन पर दिन बढ़ता है।

  1. "पाश्चात्य देशों में नया प्रभात होने वाला है।" - पंक्ति में रेखांकित पद का आशय हो सकता है?     1
    1. नया प्रकाश
    2. नया विचार
    3. नया सवेरा
    4. नया प्रभास
  2. संदर्भ के अनुसार गद्यांश में 'विमर्दित' शब्द का सटीक अर्थ क्या हो सकता है?     1
    1. ठगी हुई
    2. ग्लानिपूर्ण
    3. ईर्ष्या पूर्ण
    4. पीड़ा पूर्ण
  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -     1 
    कथन (I): मानवीय दक्षता को महत्त्व देना चाहिए।
    कथन (II): मनुष्य तथा मानवीयता से प्रेम करना चाहिए।
    कथन (III): अपनी चाल को बदल लेना चाहिए।
    कथन (IV): मानव जीवन को आदर्श मानना चाहिए।
    गद्यांश के अनुसार कौन-सा/से कथन सही हैं?
    1. केवल कथन I सही है।
    2. केवल कथन II सही है।
    3. केवल कथन II और III सही हैं।
    4.  केवल कथन I और IV सही हैं।
  4. गद्यांश के अनुसार पूर्वी देशों की समस्या क्या है?     1
    1.  मज़दूरों के लिए अधिकारों की कमी
    2.  मज़दूरों का पूँजी पतियों द्वारा शोषण
    3. मज़दूरी को कम महत्त्व का आंकना
    4. मज़दूरी पर अमीरी का प्रभाव
  5. गद्यांश के अनुसार साधारण लोग क्यों मर रहे हैं?     1
    1. मानव श्रम से ज्यादा मशीनों को महत्त्व मिलने के कारण
    2. हाथ-पाँव फटने, खून रिसने और सर्दी के कारण
    3. कम मज़दूरी मिलने कारण हुई बीमारियों से
    4. कार्य क्षेत्रों के विषैले पर्यावरण व खाने की कमी से
  6. गद्यांश में मशीनों को 'काली मशीनें' कहना किस बात की ओर संकेत करता है?     1
    1. काला रंग शोक का प्रतीक होता है।
    2. मशीनों द्वारा जन साधारण में बेरोज़गारी बढ़ाने के कारण
    3. माँ दुर्गा के अवतार काली के जैसे भक्षण करने के कारण
    4. मशीनों से अमीरों द्वारा काले धन अर्जन करने के कारण
  7. "इंजनों के पहिए के नीचे दबकर वहाँ वालों के....." इस प्रक्रिया के क्या परिणाम हुए?     1
    1. आर्थिक संपदा का अनुचित वितरण
    2. भाई बहनों व अन्य रिश्तेदारों में दुराव
    3. समस्त जाति द्वारा कठिन परिश्रम
    4. मशीनों द्वारा मनुष्यों का संरक्षण 
  8. रस्किन और टालस्टॉय का महत्त्व है क्योंकि इन्होनें ______ ।   1
    1. पूर्वी देशों में साम्राज्यवाद के विरुद्ध आवाज़ उठाई थी।
    2. मानवीय संवेदनाओं एवं गुणों को महत्त्व दिया था।
    3. धार्मिक कट्टरता के प्रति चेतना जगाई थी।
    4. गाँधी जी इन दोनों के विचारों से अत्याधिक प्रभावित थे।
  9. मनुष्य के सौभाग्य का सूर्योदय कब होगा?     1
    1. मज़दूरों द्वारा क्रांति करने से
    2. मशीनों के हट जाने से
    3. सभी लोगों को काम मिलने से
    4. मानवीय दक्षताओं को महत्त्व मिलने से
  10. मनुष्य के दुख में निरंतर वृद्धि का क्या कारण बताया गया है?     1
    1. मशीनों पर अत्यधिक आश्रित हो जाना
    2. मानवीय दक्षता की आलोचना
    3. पूँजी पतियों द्वारा गरीबों का शोषण
    4. काली मशीनों द्वारा मनुष्यों का भक्षण
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

दिए गए पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए:

कुश्ती कोई भी लड़े
ढोल बजाता है सिमरू ही
जिसके सधे हाथ
भर देते हैं जोश पूरे दंगल में
उछलने लगती है मिट्टी पूरे अखाड़े की
ताक धिना-धिन... ताक धिना-धिन
झाँकने लगते हैं लोग
एक-दूसरे के कन्धों के ऊपर से
उचक-उचक कर

बहुत गहरा है रिश्ता
सिमरू और ढोल का-
जैसे साँस और धड़कन का

ढोल ख़ामोश है
तो ख़ामोश है
अखाड़े की माटी

ख़ामोश ढोल को
जगाएँगे हाथ सिमरू के
ढोल बजेगा
जागेगा अखाड़ा
जागेगी माटी अखाड़े की
माटी ही तो है
जो स्वीकारती है सभी को
अच्छे हों या बुरे
हर रूप में!

  1. ढोल बजाता है सिमरू ही - पंक्ति में 'ही' क्या इंगित करता है?   1
    1. आदत
    2. महत्त्व
    3. आडंबर
    4. प्रेम
  2. कुश्ती में जोश कब भर आता है?   1
    1. जब हारता हुआ पहलवान जीतने लगता है।
    2. जब दोनों पहलवान बराबर की टक्कर वाले होते है।
    3. जब फ़ाइनल कुश्ती द्वारा राष्ट्रीय विजेता तय होता है।
    4. जब सिमरू द्वारा ढ़ोल बजाया जाता है।
  3. माटी द्वारा अच्छे-बुरे को स्वीकारने का क्या तात्पर्य है?   1
    1. माटी सबको जीतने का समान अवसर देती है।
    2. माटी का न्याय सबको स्वीकार्य होता है।
    3. अंत में अच्छे-बुरे सभी माटी में मिल जाते हैं।
    4. माटी की गोद में अच्छे-बुरे सभी पलते हैं।
  4. ढोल तथा अखाड़े की माटी में क्या समानता बताई गई है?   1
    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए -
    कथन (I): दोनों को उपयोग करने से पहले तैयार करना होता है।
    कथन (II): दोनों में श्रम की आवश्यकता होती है।
    कथन (III): दोनों का प्रयोग कर लोग अपनी कला सिद्ध करते है।
    कथन (IV): दोनों की परिवर्तन में भूमिका होती है।
    निम्नलिखित विकल्पों पर विचार कीजिए तथा सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    विकल्प:
    1. केवल कथन (III) सही है।
    2. केवल कथन (IV) सही है।
    3. केवल कथन (II) और (III) सही हैं।
    4. केवल कथन (I) और (IV) सही हैं।
  5. कॉलम 1 को कॉलम 2 से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए।   1
      कॉलम 1   कॉलम 2
    1 सिमरू (i) श्रमजीवी वर्ग
    2 ढोल (ii) सामाजिक भूमि
    3 अखाड़ा (iii) परिश्रम

    1. 1 - (iii), 2 - (i), 3 - (ii)
    2. 1 - (i), 2 - (iii), 3 - (ii)
    3. 1 - (i), 2 - (ii), 3 - (iii)
    4. 1 - (ii), 2 - (i), 3 - (iii)
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Chapter: [6] अपठित विभाग
Concept: अपठित पद्यांश

अभिलाषाओं की राख से तात्पर्य है -

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

सूरदास कहाँ तो नैराश्य, ग्लानि, चिंता और क्षोभ के अपार जल में गोते खा रहा था, कहाँ यह चेतावनी सुनते ही उसे ऐसा मालूम हुआ किसी ने उसका हाथ पकड़कर किनारे पर खड़ा कर दिया।

नकारात्मक मानवीय पहलुओं पर अकेले सूरदास का व्यक्तित्व भारी पड़ गया। जीवन मूल्यों की दृष्टि से इस कथन पर विचार कीजिए।

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

'तो हम सौ लाख बार बनाएंगे' इस कथन के संदर्भ में सूरदास के चरित्र की विशेषता है -

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

'अभिलाषाओं की राख है' से क्या अभिप्राय है?

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

कथन (A) - जीवन के मर्म का ज्ञान ही दुखों से मुक्ति है।

कारण (R) - सूरदास विजय गर्व की तरंग में राख के ढेर को दोनों हाथों से उड़ाने लगा।

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -

"सच्चे खिलाड़ी कभी रोते नहीं, बाजी पर बाजी हारते हैं, चोट पर चोट खाते हैं, धक्के सहते हैं पर मैदान में डटे रहते हैं।" परीक्षा के समय को आधार मानकर 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ क्या संदेश देता है?

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Chapter: [1] सूरदास की झोंपड़ी
Concept: सूरदास की झोंपड़ी

देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?

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Chapter: [1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
Concept: देवसेना का गीत

‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’- पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
Concept: कार्नेलिया का गीत

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे।

उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा।

बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल।

लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा।

हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।

मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।

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Chapter: [1.01] जयशंकर प्रसाद : (क) देवसेना का गीत, (ख) कार्नेलिया का गीत
Concept: कार्नेलिया का गीत

सरोज का विवाह अन्य विवाहों से किस प्रकार भिन्न था?

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Chapter: [1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
Concept: सरोज स्मृति

निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए - 

भर जलद धरा को ज्यों अपार;
वे ही सुख-दुख में रहे न्यस्त,
तेरे हित सदा समस्त व्यस्त;
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से हिली, पली,
अंत भी उसी गोद में शरण
ली, मूँदे दृग वर महामरण!

मुझ भाग्यहीन की तू संबल
युग वर्ष बाद जब हुई विकल,
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी कर्म पर वज्रपात 
यदि धर्म, रहे नत सदा माथ।

(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)

(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश

(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)

(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह

(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

  1. कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
  2. पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
  3. सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -

(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)

(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)

(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)

(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था

(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)

(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है

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Chapter: [1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
Concept: सरोज स्मृति

‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।

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Chapter: [1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
Concept: मैंने देखा, एक बूँद
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