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Science (Hindi Medium) इयत्ता १२ - CBSE Important Questions

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‘तोड़ो’ कविता नवसृजन की प्रेरणा है। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट कीजिए।

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Chapter: [5] रघुवीर सहाय : वसंत आया, तोड़ो
Concept: तोड़ो

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -

नाटक के विभिन्न तत्वों पर प्रकाश डालिए।

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Chapter: [5] नाटक लिखने का व्याकरण
Concept: नाटक लिखने का व्याकरण

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती का हम जानें
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने

तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो

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Chapter: [5] रघुवीर सहाय : वसंत आया, तोड़ो
Concept: तोड़ो

कहानी की परिभाषा बताते हुए इसके तत्त्वों के नाम लिखें।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

कहानी में क्लाइमेक्स का क्या महत्व है ?

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का क्या स्थान होता है?

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

कहानी का कथानक क्या होता है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य लिखिए।

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।

नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥

कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।

एहि ते अधिक कहौं मैं काहा॥

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

वियोगावस्था में सुख देने वाली वस्तुएँ भी दुख देने लगती हैं। 'गीतावली' से संकलित पदों के आधार पर सिद्ध कीजिए।

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

कहानी के पात्रों का चरित्र-चित्रण कथानक की आवश्यकता के अनुसार प्रभावशाली ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाता है। किन्हीं दो तरीकों का वर्णन उदाहरण सहित दीजिए।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥
सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा॥
बिन पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ ऐहि घाएँ॥
बहुरि निहारि निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू॥
अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई॥
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तापस तीछी॥

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर 60 शब्दों में लिखिए -

कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है? परिभाषित कीजिए।

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Chapter: [6] कैसे लिखें कहानी
Concept: कैसे लिखें कहानी

निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥
मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥
मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥
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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

भरत का आत्म परिताप उनके व्यक्तित्व के किस पक्ष की ओर संकेत करता है? वर्तमान में ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता सिद्ध कीजिए।

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Chapter: [6] तुलसीदास : भरत-राम का प्रेम, पद
Concept: भरत-राम का प्रेम

बारहमासा का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [7] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए।

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Chapter: [7] मलिक मुहम्मद जायसी : बारहमासा
Concept: बारहमासा

आशय स्पष्ट कीजिए -

जनम अबधि हम रूप निहारल नयन न तिलपित भेल॥

सेहो मधुर बोल स्रवनहि सूनल स्रुति पथ परस न गेल॥

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Chapter: [8] विद्यापति : पद
Concept: विद्यापति

‘भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह ह्दय परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।’- कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [9] रामचंद्र शुक्ल : प्रेमघन की छाया-स्मृति
Concept: प्रेमघन की छाया-स्मृति

आशय स्पष्ट कीजिए।

अधर लगे हैं आनि करि कै पयान प्रान,
चाहत चलन ये सैंदेसो लै सुजान को।

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Chapter: [9] घनानंद : कवित्त
Concept: कवित्त

रटंत या कुटेव को बुरी लत क्यों कहा गया है? नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन द्वारा इस लत से कैसे बचा जा सकता है?

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Chapter: [9] नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
Concept: नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
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