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यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों? - Hindi (Core)

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प्रश्न

यशोधर बाबू की पत्नी समय के साथ ढल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों?

निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर लगभग 100 शब्दों में उत्तर दीजिए:

समय के साथ यशोधर बाबू की पत्नी स्वयं को ढाल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों हुआ होगा? कहानी सिल्वर वैडिंग के आधार पर तार्किक टिप्पणी करें।

सविस्तर उत्तर
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उत्तर १

यशोधर बाबू की पत्नी समय को अच्छी तरह पहचानती हैं। वह जानती है कि बच्चों की सहानुभूति तभी प्राप्त की जा सकेगी जब बच्चों की सोच के अनुसार चला जाए। व्यवहार भी यही कहता है। दूसरे उसके व्यक्तित्व के विकास पर किसी व्यक्ति विशेष या वाद का प्रभाव नहीं है। तीसरे, संयुक्त परिवार के साथ उसका अनुभव सुखद नहीं रहा। उसकी इच्छाएँ अतृप्त रही। उसके अनुसार, “मुझे आचार-व्यवहार के ऐसे बंधनों में रखा गया मानो मैं जवान औरत नहीं, बुढ़िया थी।” अब वह बेटी के कहने के हिसाब से कपड़े पहनती है। वह बेटों के मामले में भी दखल नहीं देती।

दूसरी तरफ, यशोधर बाबू स्वयं को बदल नहीं पाते। वे सदैव किसी-न-किसी उलझन के शिकार हैं। वे सिद्धांतवादी हैं। इस कारण वे परिवार के सदस्यों से तालमेल नहीं बिठा पाते। उन पर किशन दा का प्रभाव है जो परंपरा को ढोते हुए अंत में फटेहाल मरे। वे संयुक्त परिवार, भारतीय परंपराओं को बनाए रखना चाहते हैं, परंतु परिवार उन्हें निरर्थक मानता है। यशोधर बाबू पार्टीबाजी, फैशन, अच्छे मकान में रहना आदि को पसंद नहीं करते। वे आधुनिक भौतिक वस्तुओं को बंधन मानते हैं। फलतः वे अलग-अलग हो जाते हैं। अंत में, उन्हें परिस्थितियों से समझौता करना पड़ता है।

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उत्तर २

यशोधर बाबू के माता पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, इसलिए वह बचपन से ही ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे थे। वह बचपन में अपनी उम्र के बच्चों के साथ नहीं बल्कि बड़े बुजुर्गों के साथ रहते थे। पले बढ़े अत: वह उन परंपराओं को छोड़ नहीं सकते थे। यशोधर बाबू अपने आदर्श किशन दा से अधिक प्रभावित है और आधुनिक परिवेश में बदलते हुए जीवन मूल्यों और संस्कारों के विरुद्ध है। जबकि उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ खड़ी दिखाई देती है वह अपने बच्चों के आधुनिक दृष्टिकोण से प्रभावित है। वे बेटी के कहे अनुसार नए कपड़े पहनती है। वह अपने बेटों की जीवन में कोई ताँक-झाँक नहीं करती। यशोधर बाबू की पत्नी आज की आधुनिकता के हिसाब से रहती है और समय में परिवर्तन होता देख ख़ुद में भी परिवर्तन लाने का प्रयास करती है परंतु यशोधर बाबू भी. पुराने रीति रिवाज़ों में बंधकर रहते हैं।

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Notes

Students should refer to the answer according to their question.

सिल्वर वैडिंग
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2025-2026 (March) Board Sample Paper

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