यशोदा अपने नटखट कृष्ण को शान्त करने के लिए बार-बार चन्द्रमा को पुकारती हैं, “आओ चाँद, मेरा लाल तुम्हें बुला रहा है; वह तुम्हें मधु-मेवा, पकवान व मिठाई खिलाएगा, तुम्हें हाथ पर उठाकर खेलेगा, धरती पर नहीं बैठाएगा।” वह पानी से भरा बर्तन (जल-बासन) उठाकर कहती हैं, “हे चंदा, इसी जल में रूप धर कर आ जाओ।” फिर वही पानी/जलपुट धरती पर रखकर उसमें पड़े चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब को कृष्ण को दिखाती हैं, “देखो, मैं चाँद पकड़ लाई हूँ।” यह देखकर कृष्ण मुसकरा उठते हैं और ताली बजाते/नाचते हैं।
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प्रश्न
यशोदा अपने पुत्र को शांत करते हुए कहती है −
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उत्तर
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