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व्याख्या करें-जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना। अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

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प्रश्न

व्याख्या करें-
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

टीपा लिहा
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उत्तर

राम विलाप करते हुए लक्ष्मण के बिना अपनी दशा का वर्णन करते हुए बताते हैं कि जैसे पक्षी पंख के बिना उड़ नहीं सकते हैं, साँप मणि के बिना अधूरा है और हाथी सूँड के बिना अधूरा है, वैसे ही राम भी लक्ष्मण के बिना अधूरे हैं। अर्थात लक्ष्मण के बिना वह स्वयं की कल्पना नहीं कर सकते हैं।

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लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
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पाठ 7: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [पृष्ठ ५१]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 7 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 5. (ख) | पृष्ठ ५१

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