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प्रश्न
वर्षा ऋतु में जब आकाश में बादल घिर आते हैं तब मोर पंख फैलाकर धीरे-धीरे मचलने लगता है यह मोहक दृश्य देखने का प्रयास कीजिए।
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उत्तर
मोर का नृत्य: एक मोहक दृश्य
वर्षा ऋतु की रिमझिम फुहारें जैसे ही धरती पर गिरने लगती हैं, आकाश में काले-काले घने बादल छा जाते हैं। वातावरण में एक सुहाना संगीत सा बजने लगता है — कहीं कोयल की कुहुक, कहीं पेड़ों की सरसराहट, और कहीं बारिश की बूँदों की टप-टप।
ऐसे ही एक नयनाभिराम क्षण में, दूर हरे-भरे खेतों में या किसी नीम-बरगद के नीचे, एक मोर धीरे-धीरे अपने पंख फैलाता है। उसके पंखों पर जैसे इंद्रधनुष उतर आया हो — नीले, हरे, सुनहरे रंगों का अद्भुत मेल। वह अपनी गर्दन को मटकाता है, धीरे-धीरे पाँव आगे बढ़ाता है, और हल्की-हल्की बारिश की बूँदों के बीच नृत्य करने लगता है।
उसके पंखों के चारों ओर झिलमिलाती बूंदें चमकने लगती हैं। मोर अपनी पूंछ को फैलाकर गोलाकार घुमाता है, और उसकी चाल में एक अलौकिक लय होती है। हर कदम पर उसकी चोंच से हल्की आवाज़ निकलती है, जैसे वो अपनी खुशी ज़ाहिर कर रहा हो।
सामने खड़े लोग और बच्चे मंत्रमुग्ध होकर इस अद्भुत दृश्य को देखते हैं। हरे खेतों के बीच नाचता मोर, बादलों की गरज के साथ तालमेल करता हुआ, जैसे पूरी प्रकृति के संग जुड़ गया हो।
वर्षा ऋतु का यह दृश्य सचमुच मन को भा जाने वाला होता है — जैसे धरती, आकाश और मोर, तीनों ने मिलकर एक सुंदर कहानी लिख दी हो।
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