मराठी

तुम्हें याद है न, उस गाँव के बुज़ुर्गों की बातें?

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प्रश्न

तुम्हें याद है न, उस गाँव के बुज़ुर्गों की बातें?

टीपा लिहा
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उत्तर

हाँ मुझे याद है। उस गाँव के बुज़ुर्गों का कहना था- “अगर पेड़ हैं, तो हम हैं”। पेड़ और जानवर हमारे बिना रह सकते हैं, पर हम उनके बिना नहीं।

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अमृता की कहानी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 4: अमृता की कहानी - पेड़ खतरे में [पृष्ठ ३४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
पाठ 4 अमृता की कहानी
पेड़ खतरे में | Q 1 | पृष्ठ ३४

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क्या तुम्हारे घर के आस-पास किसी मैदान या स्कूल के रास्ते में, कोई ऐसी जगह है जहाँ पेड़ लगाए गए हैं?


क्यों उनमें से किसी पेड़ पर फल लगते हैं? उन्हें कौन खाता है?


ललिता को लगता है कि उसके स्कूल की दीवार के साथ उगे हुए छोटे-छोटे पौधे और घास किसी ने लगाए नहीं हैं। क्या तुम भी किसी ऐसी जगह के बारे में जानते हो जहाँ घास, छोटे-छोटे पौधे और पेड़ अपने-आप ही उग गए हों?


तुम्हें यह क्यों लगता है कि ये पौधे अपने-आप उग रहे हैं?


अगर पेड़ और जानवर नहीं होंगे, तो क्या हम रहेंगे? इस बारे में कक्षा में चर्चा करो।


तुमने तीसरी कक्षा में जिस पेड़ से दोस्ती की थी, वह अब कैसा है?


किसी एक पेड़ के बारे में लिखो-

  1. क्या उस पर फूल आते हैं?
  2. फूल क्या साल भर रहते हैं?
  3. पत्तियाँ किस महीने में झड़ती हैं?
  4. क्या उस पर फल लगते हैं?
  5. फल किन-किन महीनों में लगते हैं?
  6. क्या तुमने कभी ये फल खाए हैं?

लोग शिकार क्यों करते हैं?


क्या तुम्हें पता है कि शिकार करने पर सजा होती है? शिकार करने पर सजा क्यों रखी गई है?


अपने बड़ों से पता करो कि क्या इन पेड़ों की कोई खास बात है?


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