Advertisements
Advertisements
प्रश्न
तुम्हें कविता को कोई और शीर्षक देना हो तो क्या शीर्षक देना चाहोगे? उपयुक्त शीर्षक सोच कर लिखो।
Advertisements
उत्तर
कविता का शीर्षक हो सकता है-‘नन्हीं चिड़िया’ या ‘मुँहबोली चिड़िया’|
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
चिड़िया किसके दाने खाती है?
अनाज के दाने किससे भरे हुए हैं?
कविता के आधार पर चिड़िया के स्वभाव का वर्णन कीजिए।
बहुवैकल्पिक प्रश्न
चाँद को कैसी बीमारी है?
बहुवैकल्पिक प्रश्न
बालिका ने चाँद को क्या बीमारी बताई है?
कवि के अनुसार चाँद को क्या बीमारी है?
यह ‘मरज़’ आपको अच्छा ही नहीं होने में आता है, का आशय स्पष्ट कीजिए।
कविता की दूसरी पंक्ति में भारत को 'बूढ़ा' कहकर और उसमें 'नई जवानी' आने की बात कहकर सुभद्रा कुमारी चौहान क्या बताना चाहती हैं?
चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित कमला शर्मा द्वारा लिखित उपन्यास ‘अपराजिता’।
झाँसी की रानी के जीवन से हम क्या प्रेरणा ले सकते हैं?
ऐसी कौन-सी विशेषताएँ थीं जिनके कारण मराठे लक्ष्मीबाई को देखकर पुलकित हुए?
बहुविकल्पीय प्रश्न
“मैं सबसे छोटी होऊँ’ कविता किसके द्वारा लिखी गई है?
बहुविकल्पीय प्रश्न
माँ के आँचल की छाया में बच्ची कैसा महसूस करती है?
सीता जी बेचैन होकर श्रीराम से क्या बातें कही?
कविता में सबसे छोटे होने की कल्पना क्यों की गई है?
उन क्रियाओं को गिनाओ जो इसे कविता में माँ अपनी बच्ची या बच्चे के लिए करती है।
कविता में दिन-रात’ शब्द आया है। दिन रात का विलोम है। तुम ऐसे चार शब्दों के जोड़े सोचकर लिखो, जो विलोम शब्दों से मिलकर बने हों। जोड़ों के अर्थ को समझने के लिए वाक्य भी बनाओ।
कक्षा में बच्चों को उनकी मरज़ी से दो समूहों में रखें-
(क) एक समूह में वे जो छोटे बने रहना चाहते हैं।
(ख) दूसरे समूह में वे जो बड़े होना चाहते हैं।
इन दोनों समूह के सभी बच्चे एक-एक कर बताएँगे कि वे क्यों छोटा बने रहना चाहते हैं या क्यों बड़ा होना चाहते हैं।
नगर से बाहर निकलकर दो पग चलने के बाद सीता की क्या दशा हुई?
मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उसमें एक बीज ।” उसमें एक बीज डूबा है।
जब हम किसी बात को कविता में कहते हैं तो वाक्य के शब्दों के क्रम में बदलाव | आता है, जैसे-“छाँह घरीक है ठाढ़े” को गद्य में ऐसे लिखा जा सकता है। “छाया में एक घड़ी खड़ा होकर” । उदाहरण के आधार पर नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को गद्य के शब्दक्रम में लिखो।
–पुर ते निकसी रघुबीर-बधू,
–पुट सूखि गए मधुराधर वै।
–बैठि बिलंब लौं कंटक काढ़े।
–पर्नकुटी करिहौं कित है?
