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ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है?

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प्रश्न

ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है?

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

ताप के बढ़ने पर किसी गैस की द्रवों में विलेयता घटती है। घोले जाने पर गैस के अणु द्रव प्रावस्था में विलीन होकर उसमें उपस्थित होते हैं। अत: विलीनीकरण के प्रक्रम को संघनन के समकक्ष समझा जा सकता है तथा इस प्रक्रम में ऊर्जा उत्सर्जित होती है। 

\[\ce{{गैस} +{विलायक} <=> {विलयन} +{ऊष्मा}}\]

विलीनीकरण की प्रक्रिया एक गतिक साम्य की अवस्था में होती है। अतः इसे ले-शातैलिये नियम का पालन करना चाहिए। गैस का द्रव में घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। ताप बढ़ाने पर साम्य बायीं ओर विस्थापित होता है और विलयन से गैस मुक्त होती है।

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विलेयता - गैसों की द्रवों में विलेयता
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पाठ 1: विलयन - अभ्यास [पृष्ठ २८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 12
पाठ 1 विलयन
अभ्यास | Q 1.11 | पृष्ठ २८

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