Advertisements
Advertisements
प्रश्न
ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है?
Advertisements
उत्तर
ताप के बढ़ने पर किसी गैस की द्रवों में विलेयता घटती है। घोले जाने पर गैस के अणु द्रव प्रावस्था में विलीन होकर उसमें उपस्थित होते हैं। अत: विलीनीकरण के प्रक्रम को संघनन के समकक्ष समझा जा सकता है तथा इस प्रक्रम में ऊर्जा उत्सर्जित होती है।
\[\ce{{गैस} +{विलायक} <=> {विलयन} +{ऊष्मा}}\]
विलीनीकरण की प्रक्रिया एक गतिक साम्य की अवस्था में होती है। अतः इसे ले-शातैलिये नियम का पालन करना चाहिए। गैस का द्रव में घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है। ताप बढ़ाने पर साम्य बायीं ओर विस्थापित होता है और विलयन से गैस मुक्त होती है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
सड़े हुए अंडे जैसी गंध वाली विषैली गैस H2S गुणात्मक विश्लेषण में उपयोग की जाती है। यदि H2S गैस की जल में STP पर विलेयता 0.195 M हो तो हेनरी स्थिरांक की गणना
कीजिए।
298 K पर CO2 गैस की जल में विलेयता के लिए हेनरी स्थिरांक का मान 1.67 × 108 Pa है। 500 mL सोडा जल 2.5 atm दाब पर बंद किया गया। 298 K ताप पर घुली हुई CO2 की मात्रा की गणना कीजिए।
6.56 × 10−3 g एथेन युक्त एक संतृप्त विलयन में एथेन का आंशिक दाब 1 bar है। यदि विलयन में 5.00 × 10−2 g एथेन हो तो गैस का आंशिक दाब क्या होगा?
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिक जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं।
फ़ीनॉल
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिक जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं।
टॉलूईन
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिक जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं।
फॉर्मिक अम्ल
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिक जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं।
एथिलीन ग्लाइकॉल
पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिक जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं।
पेन्टेनॉल
298 K पर मेथेन की बेन्जीन पर मोललता का हेनरी स्थिरांक 4.27 × 105 mm Hg है। 298 K तथा 760 mm Hg दाब पर मेथेन की बेन्जीन में विलेयता परिकलित कीजिए।
हेनरी के नियम के कुछ महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोग लिखिए।
