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“स्तव कर बहु-अर्थ-भरे” उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में

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प्रश्न

“स्तव कर बहु-अर्थ-भरे”

उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

मातृभाषा में कविता (भारत-स्तुति)

भारत माँ, तू ज्ञान की गंगा,
तेरी महिमा जग में चंगा।
रंग-बिरंगी संस्कृति प्यारी,
तू है सबकी राज-दुलारी।

हिम-शिखरों से सागर तक,
गूँजे तेरा यश हर पल।
प्रेम, शांति और एकता का,
तू देती है सुंदर संबल।

हिन्दी मे भावार्थ: इस कविता में भारत माता की महिमा का वर्णन किया गया है। भारत को ज्ञान, संस्कृति और विविधता की भूमि बताया गया है। हिमालय से लेकर सागर तक इसकी सुंदरता और गौरव फैला हुआ है। भारत प्रेम, शांति और एकता का संदेश देकर अपने सभी नागरिकों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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पाठ 10: भारति, जय, विजयकरे! - अभ्यास [पृष्ठ १७१]

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एनसीईआरटी Hindi Ganga [English] Class 9
पाठ 10 भारति, जय, विजयकरे!
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १७१
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