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सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

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प्रश्न

सरोज के नव-वधू रूप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

कवि के अनुसार उनकी पुत्री सरोज विवाह के समय कामदेव की पत्नी रति जैसी सुंदरी लग रही है। जब वह मंद-मंद करके हँसती है, तो लगता है मानो दामिनी (बिजली) उसके होठों के मध्य फँस गई है। विवाह की प्रसन्नता के कारण उसकी आँखों में चमक विद्यमान है। रूप और गुणों में वह अपनी माँ की प्रतिछाया प्रतित हो रही है। उसका सौंदर्य उसके अंग-प्रत्यंग में उच्छ्वास (गहरी छोड़ी गई साँस) के समान विकसित होकर फैल गया है। एक नई-नवेली दुल्हन की आँखें में व्याप्त लज्जा और संकोच उसकी आँखों को चमक से भर देता है तथा वे झुक जाती है। उनकी पुत्री की आँखें भी वैसी ही झुकी हुई तथा चमक से भरी हुई हैं। धीरे-धीरे वह चमक आँखों से उतरकर होठों पर फैल रही है। यह चमक उनकी पुत्री के होठों में स्वाभाविक कंपन पैदा कर रहा है।

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सरोज स्मृति
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.02: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १३]

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एनसीईआरटी Hindi Antara Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 1.02 सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (गीत गाने दो मुझे, सरोज स्मृति)
प्रश्न-अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १३

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भर जलद धरा को ज्यों अपार;
वे ही सुख-दुख में रहे न्यस्त,
तेरे हित सदा समस्त व्यस्त;
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से हिली, पली,
अंत भी उसी गोद में शरण
ली, मूँदे दृग वर महामरण!

मुझ भाग्यहीन की तू संबल
युग वर्ष बाद जब हुई विकल,
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी कर्म पर वज्रपात 
यदि धर्म, रहे नत सदा माथ।

(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)

(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश

(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)

(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह

(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

  1. कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
  2. पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
  3. सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -

(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)

(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)

(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)

(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था

(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)

(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है


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