Advertisements
Advertisements
प्रश्न
स्पीति के लोगों और मैदानी भागों में रहने वाले लोगों के जीवन की तुलना कीजिए। किन का जीवन आपको ज्यादा अच्छा लगता है और क्यों?
Advertisements
उत्तर
स्पीति के लोग भयंकर शीत और विषम परिस्थितियों में जीवन-यापन करते हैं। संचार माध्यम व यातायात के साधन वहाँ हैं ही नहीं। वर्ष भर ठंडक ही रहती। अल्प समय के लिए तापमान थोड़ा कम होता है। जीवन में नीरसता और आर्तनाद भरा रहता है। तरह-तरह के फल-फूल तो दूर, वनस्पति का भी वहाँ अभाव है। इसके विपरीत, मैदानी भागों में संचार और यातायात के भरपूर साधन हैं। वर्ष में सरदी, गरमी, बरसात, वसंत, पतझड़ सभी ऋतुओं का क्रम चलता रहता है। इससे जीवन की सरसता और खुशी बनी रहती है। मैदानों में हरियाली, फल-फूल, पशुपक्षी सबकुछ भरपूर है। इसीलिए तुलनात्मक दृष्टि से मैदानी भागों में जीवन ज्यादा अच्छा है, क्योंकि यहाँ सुख-सुविधाएँ, खुशियों से भरा वातावरण है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता। क्यों?
स्पीति के लोग जीवनयापन के लिए किन कठिनाइयों का सामना करते हैं?
लेखक माने श्रेणी का नाम बौद्धों के माने मंत्र के नाम पर करने के पक्ष में क्यों है?
ये माने की चोटियाँ बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं- इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से क्या आग्रह किया है?
वर्षा यहाँ एक घटना है, एक सुखद संयोग है – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?
स्पीति अन्य पर्वतीय स्थलों से किस प्रकार भिन्न है?
स्पीति में बारिश का वर्णन एक अलग तरीके से किया गया है। आप अपने यहाँ होने वाली बारिश का वर्णन कीजिए।
स्पीति में बारिश एक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें यात्रा के दौरान किए गए अनुभवों, यात्रा-स्थलों से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का बारीकी से वर्णन किया गया है। आप भी अपनी किसी यात्रा का वर्णन लगभग 200 शब्दों में कीजिए।
लेखक ने स्पीति की यात्रा लगभग तीस वर्ष पहले की थी। इन तीस वर्षों में क्या स्पीति में कुछ परिवर्तन आया है? जानें, सोचें और लिखें।
पाठ में से दिए गए अनुच्छेद में क्योंकि, और, बल्कि, जैसे ही, वैसे ही, मानो, ऐसे, शब्दों का प्रसंग करते हुए उसे दोबारा लिखिए –
लैंप की लौ तेज़ की। खिड़की का एक पल्ला खोला तो तेज हवा का झोंका मुँह और हाथ को जैसे छीलने लगा। मैंने पल्ला भिड़ा दिया। उसकी आड़ से देखने लगा। देखा कि बारिश हो रही थी। मैं उसे देख नहीं रहा था। सुन रहा था। अँधेरा, ठंड और हवा का झोंका आ रहा था। जैसे बरफ़ का अंश लिए तुषार जैसी बूंदें पड़ रही थीं।
