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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-ऐसो हियो हित पत्र पवित्र टूक कियौ पर बाँचि न देख्यौ।

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प्रश्न

संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-
ऐसो हियो हित पत्र पवित्र ______ टूक कियौ पर बाँचि न देख्यौ।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ अंतरा भाग-2 नामक पुस्तक में संकलित कवित्त से ली गई हैं। इसके रचयिता रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि घनानंद है। प्रस्तुत पंक्तियों में कवि प्रेयसी के निष्ठुर हृदय का वर्णन कर रहा है। वह कवि के प्रेम को जानते हुए भी निष्ठुर बन गई है और उसे छोड़कर चली गई है।
व्याख्या- घनानंद जी कहते हैं कि मेरे पवित्र हृदय रूपी प्रेमपत्र में मैंने कभी किसी और के बारे में उल्लेख नहीं किया। ऐसी कथा आज से पहले कभी किसी और ने लिखी नहीं थी। मैं इस बात से अनजान हूँ कि आखिर क्यों सुजान ने मेरे प्रेम पत्र को खोलकर देखा भी नहीं और उस पत्र के टुकड़े-टुकड़े करके फेंक दिए। अर्थात उसने मेरे हृदय में व्याप्त प्रेम भावनाओं को समझा भी नहीं और मुझे अकेला छोड़ दिया।

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