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शिक्षकों को अपने यहाँ बहुत से विशेषणों से संबोधित किया जाता रहा है। शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। युवा पीढ़ी का सुधारक, मशाल-वाहक और पथ-प्रदर्शक भी कहा जाता है। - Hindi Course - A

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

             शिक्षकों को अपने यहाँ बहुत से विशेषणों से संबोधित किया जाता रहा है। शिक्षक को राष्ट्र-निर्माता कहा जाता है। युवा पीढ़ी का सुधारक, मशाल-वाहक और पथ-प्रदर्शक भी कहा जाता है। शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ अपने शिष्यों को जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का भी ज्ञान प्रदान करते हैं। मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण की अपेक्षा भी शिक्षकों से ही की जाती है। शिक्षकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने में भी है।

             हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथों में जगह-जगह एक आदर्श गुरु के गुणों को वर्णित किया गया है। स्कंद पुराण के गुरु-स्तोत्रम् में तो गुरुओं की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है तथा गुरु को साक्षात् परब्रह्म माना गया है। एक अच्छे गुरु में गहन ज्ञान, विद्वत्ता, करुणा, नैतिकता व चरित्र, नवीनता, नवाचार, अनुशासनप्रियता और समानता का भाव अपेक्षित है। यही गुण एक गुरु को महान बनाते हैं और शिष्यों के जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। अपनी सदी के महान कवि और संत कबीरदास जी ने भी कहा है- ‘गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि का खोट’- अर्थात् गुरु कुम्हार है और शिष्य घड़ा है जो गढ़-गढ़ कर शिष्य की कमियों को दूर करता है। शिक्षक अपने सफल मार्गदर्शन द्वारा शिष्यों को उनकी शक्तियों से परिचित कराते हुए उनके विकास के मार्ग को प्रशस्त करते हैं। शिक्षक समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने में एक अहम् भूमिका निभाते हैं।

(क) शिक्षक शिक्षा के साथ-साथ शिष्यों को प्रदान करता है-  (1)

  1. नैतिक मूल्यों का ज्ञान।
  2. धन-अर्जित करने का ज्ञान।
  3. पेशेवर विकास का ज्ञान।
  4. भविष्य सुनिश्चित करने का ज्ञान।

(ख) गुरु को ब्रह्मा क्यों कहा गया है?  (1)

  1. छात्रों के हित गुरु के भीतर छिपी कल्याण-भावना के कारण।
  2. समाज के भविष्य निर्माताओं को तैयार करने की भूमिका के कारण।
  3. छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण।
  4. रोजगार हेतु विद्यार्थियों में कौशल विकास करने के कारण।

(ग) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कीजिए:   (1)

कथन: मानव जाति के लिए नई सोच और दृष्टिकोण विकसित करना शिक्षक का दायित्व है।

कारण: हमारी ज्ञान परंपरा और ग्रंथों में गुरु को महान बताया गया है।

  1. कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
  2. कारण सही है लेकिन कथन गलत है।
  3. कथन सही है लेकिन कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
  4. कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

(घ) शिक्षक को पथ-प्रदर्शक क्यों कहा जाता है? किन्हों दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।   (2)

(ङ) कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से क्यों की है? किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।   (2)

आकलन
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उत्तर

(क) नैतिक मूल्यों का ज्ञान।

(ख) छात्रों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के कारण।

(ग) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण कथन की सही व्याख्या करता है।

(घ)

  1. शिक्षक नई पीढ़ी के मार्गदर्शक होते हैं।
  2. वे युवाओं के जीवन-कौशल और नैतिक मूल्यों का विकास करते हैं। समाज को मजबूत और समृद्ध बनाते हैं।

(ङ) कबीरदास जी ने गुरु की तुलना कुम्हार से की है, क्योंकि-

  1. समय आने पर मौजूद दोषों को गुरु अपने उपदेशों आदि के माध्यम से दूर करता है। जैसे एक कुम्हार घड़े की खामियों को थपथपाकर समाप्त करता है और उसे सुंदर आकार देता है।
  2. ‘बालमन’ समय के झोंकों से विचलित हो जाता है। ऐसी अवस्था में गुरु अपने शिष्य को उसकी क्षमताओं से अवगत कराते हुए उसका पथप्रदर्शक बनकर भविष्य निर्माता बन जाता है।
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