मराठी

“सचमुच बहुत सुन्दर हो। जानती हो, अपरिचित होते हुए भी तुम मुझे अपरिचित नहीं लग रही?” (a) उक्त पंक्तियाँ नाटक के किस अंक से ली गई हैं? इन पंक्तियों का वक्ता कौन है? - Hindi (Indian Languages)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

“सचमुच बहुत सुन्दर हो। जानती हो, अपरिचित होते हुए भी तुम मुझे अपरिचित नहीं लग रही?”

  1. उक्त पंक्तियाँ नाटक के किस अंक से ली गई हैं? इन पंक्तियों का वक्ता कौन है?  [1]
  2. यहाँ किसके ‘अपरिचित’ होने की बात की जा रही है? वह अपरिचित होते हुए भी अपरिचिंत क्यों नहीं लग रही थी?  [2]
  3. वक्ता का संक्षिप्त परिचय देते हुए उसके चरित्र की कोई तीन विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।  [4]
सविस्तर उत्तर
Advertisements

उत्तर

  1. प्रस्तुत पंक्तियाँ नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ के द्वितीय अंक से ली गई हैं। इन पंक्तियों में वक्ता प्रियंगुमंजरी है।
  2. इन पंक्तियों में मल्लिका को अपरिचित बताया गया है। किंतु मल्लिका द्वारा दिए गए सम्मान और आत्मीय व्यवहार के कारण प्रियंगुमंजरी को मल्लिका, अपरिचित होते हुए भी अनजानी नहीं लगी।
  3. नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ में प्रियंगुमंजरी एक राजकन्या है तथा वह कालिदास की पत्नी भी है। वह नाटक में अल्प समय के लिए ही आती है। स्वभाव से वह उदार, सहृदय और सरल है। वह कालिदास के गाँव आकर मातुल के यहाँ ठहरती है। उसे अपने राजकन्या होने का कोई गर्व नहीं है और मल्लिका के प्रति उसका व्यवहार भी स्नेहपूर्ण रहता है। वह मल्लिका का विवाह कालिदास से कराना चाहती है।

प्रियंगुमंजरी प्रकृति-प्रेमी है और उस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए उत्सुक रहती है, जहाँ कालिदास की काव्य-प्रतिभा विकसित हुई थी।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2021-2022 (March) Official Board Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×