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प्रश्न
“बताओ मातुल में ऐसा क्या है जिसके आगे कोई सिर झुकाएगा? मातुल न देवी है न देवता, न पंडित है, न राजा है। तो फिर क्यों कोई सिर झुकाकर मातुल की वन्दना करे?”
- प्रस्तुत कथन का वक्ता कौन है? वक्ता किससे बात कर रहा है? [1]
- वक्ता की वंदना सिर झुकाकर कौन और क्यों करते थे? कोई दो कारण लिखिए। [2]
- वक्ता का संक्षिप्त परिचय देते हुए उसके चारित्र की कोई तीन विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए। [4]
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
- प्रस्तुत कथन में वक्ता मातुल है और वह मल्लिका से संवाद कर रहा है।
- वक्ता मातुल उन लोगों के सामने आदरपूर्वक नमन करता है, जिनसे वह सम्मान प्राप्त करना चाहता है। वह स्वयं को उनसे श्रेष्ठ नहीं मानता और विनम्रता से सिर झुकाता है। मातुल राजपुरुष है और गुप्त वंश का प्रतिनिधि होने के कारण उसे राजकीय सम्मान प्राप्त होता है।
- मातुल कालिदास के कुल का प्रतिष्ठित व्यक्ति तथा एक कवि है। वह कालिदास को उज्जयिनी जाने के लिए प्रेरित करता है। मातुल कर्मठ स्वभाव का व्यक्ति है और प्रियंगुमंजरी के सामने अपने परिश्रम का परिचय देते हुए कहता है कि वह निरंतर कठिन परिश्रम करता रहता है। नाटक की कथा में मातुल एक केंद्रीय पात्र के रूप में उपस्थित है। राजकन्या प्रियंगुमंजरी उसी स्थान पर आकर ठहरती है। वह कालिदास और मल्लिका के बीच सेतु का कार्य करती है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
