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सभी के लिए समावेशी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुनिश्चितता हेतु, भारत सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण योजनाएँ प्रारंभ की हैं, जिनका उद्देश्य पहुँच, समानता व शिक्षण अधिगमों में सुधार लाना है

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प्रश्न

निम्नलिखित गद्य का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें:

सभी के लिए समावेशी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुनिश्चितता हेतु, भारत सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण योजनाएँ प्रारंभ की हैं, जिनका उद्देश्य पहुँच, समानता व शिक्षण अधिगमों में सुधार लाना है, विशेष रूप से वंचित समूहों में।
4 अगस्त, 2009 को भारतीय संसद द्वारा पारित शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 6-14 वर्ष की आयु के सभी बालक बालिकाओं को प्राथमिक शिक्षा पूरी होने तक, निकटवर्ती विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त होने की गारंटी प्रदान करता है। ऐसी ही एक अन्य प्रमुख पहल, सर्व शिक्षा अभियान (SSA) भी है। इसे 2001 में, प्रारंभ किया गया था। यह प्रारंभिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लिए भारत के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है।
1 जुलाई, 2015 को प्रारंभ किया गया डिजीटल इंडिया अभियान, विशेष रूप से ग्रामीण व दूरदराज़ के क्षेत्रों में, मोबाइल व इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार करके, भारत को डिजीटल रूप से सशक्त समाज में बदलने पर केंद्रित है। यह पहल डिजीटल शिक्षा व शैक्षिक संसाधनों तक पहुँच का समर्थन करती है।
इन सभी पहलों के माध्यम से, सरकार सभी बच्चों के लिए एकसमान, सुलभ व गुणवत्ता संचालित शैक्षिक वातावरण बनाने का प्रयास करती है, जो कि राष्ट्रीय विकास की एक मजबूत नींव रखता है।

उपरोक्त गद्य व सामान्य ज्ञान के आलोक में, निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दें:

  1. पहचानिये कि, कौन सा कानून 14 वर्ष की आयु तक निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की गारंटी प्रदान करता है? समझाइए कि, यह किस प्रकार शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करने में सहायके है।     [3]
  2. आपके मत में, शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय में वृद्धि ने भारत के सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन में किस प्रकार योगदान प्रदान किया है? अपने उत्तर के समर्थन में उचित तर्क प्रस्तुत करें।     [3]
स्पष्ट करा
सविस्तर उत्तर
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उत्तर

  1. बालकों के निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE), जो 4 अगस्त 2009 को पारित हुआ, प्रत्येक 6–14 वर्ष आयु के बच्चे के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की गारंटी देता है।

    • यह अधिनियम शिक्षा निःशुल्क सुनिश्चित करता है और विद्यालयों की व्यवस्था करने का दायित्व राज्य पर लगाता है, ताकि आर्थिक कारण निर्धन परिवारों के लिए बाधा न बनें।

    • अधिनियम के अनुसार बच्चों का निकटतम (पड़ोस) स्कूलों में प्रवेश अनिवार्य है तथा स्थानीय प्राधिकारी विद्यालयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के दायित्व में बाध्य हैं, जिससे दूरी व समय संबंधी अड़चनें कम होती हैं।

    • यह बहिष्करण के विरुद्ध सुरक्षा‑प्रावधान भी शामिल करता है, जो नामांकन और छात्र‑रक्षा (enrolment and retention) बढ़ाते हैं तथा भेदभाव घटाते हैं।

  2. शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय में वृद्धि मानव‑पूंजी निर्माण को प्रेरित करती है। सामाजिक दृष्टि से यह समानता को बढ़ावा देती है क्योंकि हाशिये पर रहने वाले समुदायों के बच्चे गरीबी के चक्र को तोड़ सकते हैं; आर्थिक दृष्टि से यह एक कुशल कार्यबल तैयार करती है। जनसंख्या की साक्षरता तथा तकनीकी‑कुशलता (जैसे Digital India जैसी योजनाओं के माध्यम से) में सुधार होने पर उत्पादकता, नवाचार और GDP वृद्धि में वृद्धि देखी जाती है। शिक्षा‑प्राप्त जनता स्वास्थ्य व नागरिक कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझती है, जिससे समग्र जीवन‑मानक में सुधार होता है।
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2025-2026 (March) 58/1/2
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