मराठी

रंगाई शब्द रंग से बना है। इसी तरह और शब्द बनाओ – रंग रंगाई साफ़ ______ चढ़ ______ बुन ______

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प्रश्न

रंगाई शब्द रंग से बना है। इसी तरह और शब्द बनाओ –

रंग

रंगाई

साफ़

______

चढ़

______

बुन

______

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

रंग

रंगाई

साफ़

सफ़ाई

चढ़

चढ़ाई

बुन

बुनाई

धोना

धुलाई

महंगा

महंगाई

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कब आऊँ
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: कब आऊँ - कब आऊँ [पृष्ठ ७२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Rimjhim Class 3
पाठ 9 कब आऊँ
कब आऊँ | Q 1. | पृष्ठ ७२

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सेठ ने किस रंग में कपड़ा रंगने को कहा?


सेठ कपड़ा लेने किस दिन आया होगा?


नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –

मामू लीला मौसी कहाँ है?


नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –

गोपाल कबूतर उड़ा दो।


चित्र को देखो। क्या इसे देखकर तुम्हें कुछ मुहावरा या कहावत याद आती हैं? उन्हें लिखो।

  अँधेरा
________________________

चित्र को देखो। क्या इसे देखकर तुम्हें कुछ मुहावरा या कहावत याद आती हैं? उन्हें लिखो।

आरसी
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सही जोड़ो मिलाओ।


चित्र को देखो। क्या इसे देखकर तुम्हें कुछ मुहावरा या कहावत याद आती हैं? उन्हें लिखो।

ग्यारह
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जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –

अवंती ने सेठ का मंसूबा भाँप लिया।


जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –

मैं तुम्हारा हुनर देखना चाहता हूँ।


जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –

सेठ बुलंद आवाज़ में बोला।


जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –

सेठ को ईर्ष्या होने लगी।


जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –

रंग के बारे में मेरी कोई खास पसंद तो है नहीं।


दिन – दीन     मेला – मैला।

ऊपर दिए गए शब्दों के जोड़ों में केवल एक मात्रा बदली गई है। किसी भी मात्रा को बदलने से अर्थ भी बदल जाता है। ऐसे और जोड़े बनाओ। देखें, कौन सबसे ज़्यादा जोड़े ढूँढ़ पाता है।

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कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –

बाज़ार से हरा धनिया पत्ती भी ले आना।


कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –

ज़ेबा, बगीचे से दो ताज़े नीबू तोड़ लो।


कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –

बेकार की फ़ालतू बात मत करो।


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