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प्रश्न
‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक एकांकी की भावना को प्रकट करने के लिए अत्यंत उपयुक्त है। रीढ़ शरीर का ऐसा अंग है जो उसे सीधा रखता है, संतुलन बनाए रखता है और लचीलापन प्रदान करता है। जिस प्रकार शरीर में रीढ़ की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार समाज में भी रीढ़ यानी साहस, आत्मबल और दृढ़ सोच की आवश्यकता होती है।
इस एकांकी में उमा का चरित्र उस मजबूत रीढ़ की हड्डी का प्रतीक है जो अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़ी होती है। दूसरी ओर, शंकर जैसे लोग रीढ़हीन व्यक्तित्व के प्रतीक हैं, जो समाज की रूढ़ियों और परिवार की झूठी प्रतिष्ठा के दबाव में जीते हैं। ऐसे लोग बिना सोच-समझ के दूसरों के इशारे पर चलते हैं और समाज के लिए केवल बोझ बनते हैं।
एकांकी में उमा जब गुस्से में कहती है – “आपके लाड़ले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं?” – तो यह संवाद पूरे नाटक की आत्मा को प्रकट करता है। यह वाक्य समाज की पितृसत्तात्मक, दिखावटी और चरित्रहीन सोच पर सीधा प्रहार करता है।
अतः ‘रीढ़ की हड्डी’ एक प्रतीक है साहसी, आत्मनिर्भर और सच के लिए खड़े होने वाले व्यक्तित्व का, जो इस एकांकी का केंद्रीय संदेश भी है।
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