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पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में पनप रही 'दिखावे की संस्कृति' पर विचार व्यक्त कीजिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में पनप रही 'दिखावे की संस्कृति' पर विचार व्यक्त कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

"जो दिखता है वही बिकता है"। आज के युग ने इसी कथ्य को स्वीकारा है। ज़्यादातर लोग अच्छे विज्ञापन, उत्पाद के प्रतिष्ठा चिह्न को देखकर प्रभावित होते हैं। दिखावे की इस संस्कृति ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरियाँ बढ़ा दी है। यह संस्कृति मनुष्य में भोग की प्रवृति को बढ़ावा दे रही है। हमें इस पर नियंत्रण करना चाहिए।

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गद्य (Prose) (Class 9 A)
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पाठ 3: उपभोक्तावाद की संस्कृति - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ३९]

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एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 1 Class 9
पाठ 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति
प्रश्न अभ्यास | Q 7 | पृष्ठ ३९

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इस वाक्य में 'बदल रहा है' क्रिया है। यह क्रिया कैसे हो रही है -धीरे-धीरे। अत: यहॉँ धीरे-धीरे क्रिया-विशेषण है। जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जहाँ वाक्य में हमें पता चलता है क्रिया कैसे, कब, कितनी और कहाँ हो रही है, वहाँ वह शब्द क्रिया-विशेषण कहलाता है।

(क) ऊपर दिए गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया-विशेषण से युक्त लगभग पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।

(ख) धीरे-धीरेज़ोर सेलगातार, हमेशा, आजकल, कम, ज़्यादा, यहाँ, उधर, बाहर - इन क्रिया-विशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।

(ग) नीचे दिए गए वाक्यों में से क्रिया-विशेषण और विशेषण शब्द छाँटकर अलग लिखिए -

वाक्य क्रिया-विशेषण विशेषण

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