मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ९ वी

रेखांकित वाक्‍यांश के स्‍थान पर उचित मुहावरा लिखिए: रुग्‍ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीर-धीरे समाप्त हो रहा था।

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प्रश्न

रेखांकित वाक्‍यांश के स्‍थान पर उचित मुहावरा लिखिए:

रुग्‍ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीर-धीरे समाप्त हो रहा था।

पर्याय

  • तिल-तिल मिटना

  • जिस्‍म टूटना

MCQ
अति संक्षिप्त उत्तर
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उत्तर

रुग्ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज तिल-तिल मिट रहा था।

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व्याकरण
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.09: वरदान माँगूँगा नही - पाठ के आँगन में [पृष्ठ ३३]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Lokbharati Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.09 वरदान माँगूँगा नही
पाठ के आँगन में | Q (३) | पृष्ठ ३३

संबंधित प्रश्‍न

शरीर के विभिन्न अंगों से संबंधित मुहावरों की अर्थ सहित सूची बनाओ।


उपसर्ग/प्रत्‍यय अलग करके मूल शब्‍द लिखो :

भारतीय, आस्‍थावान, व्यक्‍तित्‍व, स्‍नेहिल, बेबात, निरादर, प्रत्‍येक, सुयोग


पाठ्‌यपुस्‍तक से दस वाक्‍य चुनकर उनमें से उद्देश्य और विधेय अलग करके लिखो।


लिखो :

पर्यायवाची शब्द :


निम्‍नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्‍यों में प्रयोग कराे :

ज्‍वार


कविता (सौहार्द-सौमनस्‍य) में प्रयुक्‍त विलोम शब्‍दों की जोड़ियाँ लिखो।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

डायनासोर प्राणी अब दुर्लभ हो गए हैं।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

गर्मियों में सारी धरती शुष्क हो जाती है।


निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:

हम हँसो कि फूले-फले देश।


प्रेरणार्थक क्रिया का रूप पहचानकर उसका वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:

महाराजा उम्‍मेद सिंह द्‌वारा निर्मित होने से ‘उम्‍मेद भवन’ कहलवाया जाता है।


सहायक क्रिया का वाक्‍य में प्रयोग कीजिए।

करना


दिए गए अव्यय भेदों के वाक्‍य पाठ्‌यपुस्तक से ढूँढ़कर लिखिए:


दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________

__________________


निम्नलिखित शब्द के युग्म शब्द बताओ और वाक्य में उचित शब्दयुग्म लिखो:

______ - उधर

बगीचे में आते ही सभी बच्चे ______ दौड़ने लगे।


अर्थ के आधार पर वाक्य पढ़ो, समझो और उचित स्थान पर लिखो :

खूब पढ़ो खूब बढ़ो।


निम्नलिखित शब्दों के लिंग और वचन बदलकर लिखो।

स्त्रीलिंग पुल्लिंग
एकवचन बहुवचन एकवचन बहुवचन
भैंस भैंसें भैंसा भैंसे
______ ______ बिलाव ______
घोड़ी ______ ______ ______
______ ______ ______ नाग
______ चुहियाँ ______ ______

निम्नलिखित कारकों का अपने वाक्यों में प्रयोग करो।

ने ______
को ______
से ______
को ______
से ______
का, की, के ______
में, पर ______
अरे! ______

निम्न विशेषण शब्द का अपने वाक्य में प्रयोग करके उनका प्रकार लिखो।


‘मैं सेवाग्राम में ............... माँ जैसी लगती’ गद्यांश में क्रिया पर ध्यान दीजिए।


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

तुम मेरे मित्र हो, मैं आपको खूब जानता हूँ।


शब्‍द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्‍य में प्रयोग कीजिए:-

गौ


शब्‍द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-

विग्रह  शब्द  विलोम
+ दुर्लभ ×

शब्‍द के लिंग पहचानिए:

ज्ञान = ______


शब्‍द पहेली से मुहावरे, कहावतें ढूँढ़िए। उनकी सूची बनाइए और अर्थ बताकर उनका अपने वाक्‍यों में प्रयोग कीजिए:-

आँखों से ईंट का कमर डूबते हाथ अँधेरा होगा
ओखली में ऊँट के तोड़ना तारा तले जवाब चार
छाती ओझल को जीरा देना निकालना पत्‍थर से
चिराग तिनके का सहारा होना आरसी मुँह में देना
आँखों का क्‍या मात कंगन को सिर देना कलेजा
लालच कचूमर हाथ आना फुलाना मुँह को चाँद
जड़ से बुरी मलना उखाड़ बला लगाना देना

 

मुहावरे कहावतें
   

निम्‍न वाक्‍य के उद्देश्य और विधेय पहचानकर लिखिए:-

गायन में अलाप और तानों का महत्‍त्‍व होता है।


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
सन्मति ______ + ______  

वचन बदलिए।

व्यक्‍ति = ______ 


इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्‍सम, तद्भव शब्‍द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्‍द ढूँढ़िए।

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।


मुहावरों का प्रयोग/चयन करनाा ।

‘मुहावरा’ शब्द अरबी भाषा का है जिसका अर्थ ‘अभ्यास होना’ या आदी होना’ होता है। इस प्रकार मुहावरा शब्द अपने-आप में स्वयं मुहावरा है, क्योंकि यह अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर असामान्य अर्थ प्रकट करता है।


निम्नलिखित वाक्य के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए।

अपनी दुकान बेचने के सिवाय उसके पास और कोई उपाय नहीं था।


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