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रचनाकार की भीतरी विवशता ही उसे लेखन के लिए मजबूर करती है और लिखकर ही रचनाकार उससे मुक्त हो पाता है। - Hindi Course - A

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प्रश्न

रचनाकार की भीतरी विवशता ही उसे लेखन के लिए मजबूर करती है और लिखकर ही रचनाकार उससे मुक्त हो पाता है। 'मैं क्यों लिखता हूँ' पाठ के आधार पर हिरोशिमा घटना से जोड़ते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

भीतरी विवशता लेखन के लिए मजबूर करती है, जो आंतरिक अनुभूति से उत्पन्न होती है। किसी घटना विशेष का अनुभव जब घनीभूत होता है, तब मन में संवेदनशीलता अकुलाती है और यही अकुलाहट अभिव्यक्ति का आधार बनती है। अनुभव, आंतरिक अनुभूति, विवशता, संवेदना के बाद पृष्ठों पर कुछ उतरता है, बाहरी दबाव की अपेक्षा लेखन के लिए आंतरिक अनुभूति कहीं अधिक प्रभावी है। लेखक ने हिरोशिमा की विभीषिका को पत्थर पर उतरी मनुष्य की छाया से महसूस किया और इसी अनुभूति के घनीभूत होते ही हिरोशिमा पर कविता लिख दी।

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मैं क्‍यों लिखता हूँ?
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2022-2023 (March) Sample

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