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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (मराठी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘प्राकृतिक सौंदर्य का सच्चा आनंद आँचलिक (ग्रामीण) क्षेत्र में ही मिलता है’, चर्चा कीजिए।

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प्रश्न

‘प्राकृतिक सौंदर्य का सच्चा आनंद आँचलिक (ग्रामीण) क्षेत्र में ही मिलता है’, चर्चा कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

छोटे-छोटे मिट्टी के घरों और आसपास के पेड़-पौधों को देखकर गाँव का मनोरम दृश्य दिल को खुश कर देता है। प्रकृति की सुंदरता का महत्व और इसकी मानव जीवन में भूमिका को समझाया जा सकता है। ताजी हवा में लहराते पेड़ और फसलें ऐसा प्रतीत होती हैं मानो वे आपस में संवाद कर रहे हों। गाँव में विभिन्न प्रकार के जानवर घास चरते हुए नजर आते हैं। कृषि, गाँव का वातावरण, बाग-बगीचे और स्थानीय समृद्धि इस आनंद को बढ़ाते हैं। जंगलों में आम, अमरूद, लीची आदि के पेड़ों पर लगे फलों को तोड़कर खाने का अनुभव अद्वितीय आनंद प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग आपसी सहायता और सामूहिकता की भावना से जीते हैं, जिससे वे प्राकृतिक सुंदरता का पूर्ण रूप से आनंद लेते हैं। वर्षा ऋतु में मोर को पंख फैलाकर नाचते देखना मन को प्रसन्न करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुशासन और समर्पण की भूमिका प्राकृतिक सौंदर्य का अधिक आनंद लेने में मदद कर सकती है। नदी या तालाब के किनारे बैठकर अधिकतम शांति प्राप्त होती है। गाँव के शुद्ध वातावरण में रहने से स्वास्थ्य लाभ और ताजगी महसूस होती है। इसलिए कहा जा सकता है कि प्राकृतिक सौंदर्य का सच्चा आनंद ग्रामीण क्षेत्रों में ही मिलता है।

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ग्रामदेवता
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पाठ 2.3: ग्रामदेवता - स्वाध्याय [पृष्ठ ३४]

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बालभारती Hindi (Composite) Lokvani Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 2.3 ग्रामदेवता
स्वाध्याय | Q २ | पृष्ठ ३४
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