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प्रश्न
पद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टाः कृतीः कुरुत।
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घटं भिन्द्यात् पटं छिन्द्यात् कुयद्रासभरोहणम्। येन केन प्रकारेण प्रसिद्ध: पुरुषो भवेत्।।1।। यधा चतुर्भि: कनकं परीक्ष्यते निघर्षणच्छेदनतापताडनै:। तथा चतुर्भि: पुरुष: परीक्ष्यते श्रुतेन शीलेन गुणेन कर्मणा।।2।। स छिन्नपक्षः सहसा रक्षसा रौद्रकर्मणा। निपपात हतो गृध्रो धरण्यामल्पजीवित:।।3।। अयं न भक्तो न च पूजको वा। घण्टां स्वयं नादयते तथापि। धनं जनेभ्य: किल याचतेऽयं न याचको वान च निर्धनो वा।। 4।। |
(1) पद्यांशं पठित्वा निर्दिष्टा: कृतीः कुरुत। (3 तः 2) 2
(क) पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत। 1
निघर्षणच्छेदनतापताडनै: कस्य परीक्षा भवति?
(ख) विशेषण-विशेष्ययोः मेलनं कुरुत। 1
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (1) छिन्नपक्षः | पुरुषः |
| (2) प्रसिद्धः | कर्मणा |
| गृध्रः |
(ग) सन्धिविग्रहं कुरुत। 1
याचतेऽयम् = ........ + ........।
(2) जालरेखाचित्रं पूरयत। 2

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उत्तर
(1)
(क) निघर्षणच्छेदनतापताडनै: कनकस्य परीक्षा/कनकपरीक्षा भवति।
(ख)
| ‘अ’ | ‘आ’ |
| (1) छिन्नपक्षः | गृध्रः |
| (2) प्रसिद्धः | पुरुषः |
(ग)
याचतेऽयम् = याचते + अयम्।
(2)

