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पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए − बंद दरवाज़े खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना। - Hindi Course - B

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प्रश्न

निम्नलिखित शब्द-युग्मों और शब्द-समूहों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −

(क) छन्नी-ककना अढ़ाई-मास पास-पड़ोस
  दुअन्नी-चवन्नी मुँह-अँधेरे झाड़ना-फूँकना
(ख) फफक-फफककर बिलख-बिलखकर  
  तड़प-तड़पकर लिपट-लिपटकर  
टीपा लिहा
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उत्तर

(क)

  1. छन्नी-ककना − मकान बनाने में उसका छन्नी-ककना तक बिक गया।
  2. अढ़ाई-मास − वह विदेश में अढ़ाई-मास ही रहा।
  3. पास-पड़ोस − पास-पड़ोस अच्छा हो तो समय अच्छा कटता है।
  4. दुअन्नी-चवन्नी − आजकल दुअन्नी-चवन्नी को कौन पूछता है।
  5. मुँह-अँधेरे − वह मुँह-अँधेरे उठ कर चला गया।
  6. झाड़-फूँकना − गाँवों में आजकल भी लोग झाँड़ने-फूँकने पर विश्वास करते हैं।

(ख)

  1. फफक-फफककर − बच्चे फफक-फफककर रो रहे थे।
  2. तड़प-तड़पकर − आंतकियों के लोगों पर गोली चलाने से वे तड़प-तड़पकर मर रहे थे।
  3. बिलख-बिलखकर − बेटे की मृत्यु पर वह बिलख-बिलखकर रो रही थी।
  4. लिपट-लिपटकर − बहुत दिनों बाद मिलने पर वह लिपट-लिपटकर मिली।
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गद्य (Prose) (Class 9 B)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1: यशपाल - दुःख का अधिकार - भाषा अध्ययन [पृष्ठ १२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Sparsh Part 1 Class 9
पाठ 1 यशपाल - दुःख का अधिकार
भाषा अध्ययन | Q 5 | पृष्ठ १२

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निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो

  1. कङ्घा, पतङ्ग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध।
  2. कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध।
  3. अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअन्नी, चवन्नी, अन्न।
  4. संशय, संसद्, संरचना, संवाद, संहार।
  5. अँधेरा, बाँट, मुँह, ईंट, महिलाएँ, में, मैं।

ध्यान दो कि ङ, ज्, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं-इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे-अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्गों में से किसी भी एक वर्ष की भाँति हो सकता है; जैसे-संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ङ’।
( ं) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( ँ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमशः बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार को प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।


निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इस प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए :

(क)

  1. लड़के सुबह उठते ही भूख से बिलबिलाने लगे।
  2. उसके लिए तो बजाज की दुकान से कपड़ा लाना ही होगा।
  3.  चाहे उसके लिए माँ के हाथों के छन्नी-ककना ही क्यों न बिक जाएँ।

(ख) 

  1. अरे जैसी नीयत होती है, अल्ला भी वैसी ही बरकत देता है।

  2. भगवाना जो एक दफे चुप हुआ तो फिर न बोला।


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