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प्रश्न
पाठ के आधार पर कृतघ्नता, असंतोष के संबंध में लेखक की धारणा लिखिए।
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उत्तर
कृतज्ञता एक दैवीय गुण है। जिसने हमें सहायता पहुँचाई हो, उसके प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए, उसका उपकार मानना चाहिए। बहुत-से लोग आवश्यकता के समय तो चिकनी-चुपड़ी बातें करके अपना काम निकाल लेते हैं परंतु काम निकल जाने के बाद मुँह फिरा लेते हैं। यह बहुत बड़ी कृतघ्नता है। कृतघ्न व्यक्ति । कभी सुखी नहीं रह सकता। जो उसकी मदद करते हैं, वह उन्हीं का बुरा सोचता है। यह एक चोरवृत्ति है। ऐसे लोग केवल स्वयं । के प्रति कृतज्ञ होते हैं। मानव का दूसरा बड़ा अवगुण है असंतोष। आज का मनुष्य संतुष्ट होना ही नहीं जानता। एक समय था मनुष्य। की जरूरतें अत्यंत सीमित थीं। जितना मिल जाता था, उसी में वह संतोष कर लेता था। परंतु आज जितना भी मिल जाए, वह कम ही लगता है। और अधिक पाने की चाह हमें प्राप्य वस्तुओं का भी आनंद नहीं लेने देती।
