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प्रश्न
पारे से भरी किसी U नली का एक सिरा किसी चूषण पंप से जुड़ा है तथा दूसरा सिरा वायुमंडल में खुला छोड़ दिया गया है। दोनों स्तंभों में कुछ दाबांतर बनाए रखा जाता है। यह दर्शाइए कि जब चूषण पंप को हटा देते हैं, तब U नली में पारे का स्तंभ सरल आवर्त गति करता है।
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उत्तर

सामान्यत: U नली में द्रव (पारा) भरने पर उसके दोनों स्तंभों व में पारे का तल समान होगा। परंतु चूषण पंप द्वारा दाबांतर बनाये रखने की स्थिति में यदि स्तंभ में पारे का तल सामान्य स्थिति से y दूरी नीचे है । तो दूसरे स्तंभ में यह सामान्य स्थिति से y दूरी ऊपर होगा। अत: दोनों । स्तंभ में पारे के तलों का अंतर = 2y, चूषण पंप हटा लेने पर U नली के दायें स्तंभ में पारे पर नीचे की ओर कार्य करने वाला बल = 2y ऊँचाई के पारा स्तंभ का भार = 2y ρga.
जहाँ a = U नली स्तंभों की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
ρ = पारे का घनत्व; g = गुरुत्वीय त्वरण
अत: बायीं भुजा में पारा ऊपर की ओर चढ़ेगा तथा इस पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल (जिसके अंतर्गत यह गति करेगा)
F = -2yρga, दोनों स्तंभों में पारे के स्तंभ की ऊँचाई समान होने की स्थिति में यदि ऊँचाई h हो तो U नली में भरे पारे के स्तंभ की कुल लंबाई = 2h अतः पारे का कुल द्रव्यमान m = 2h × ρ × a
∴ पारे की गति का त्वरण `alpha = ("F"/"m") = (-2 "y"rho"g"alpha)/(2 "h"rhoalpha) = ("g"/"h")*"y"` ...(1)
∵ (g/h) = नियतांक ⇒ α ∝ -y
यह पारे के स्तंभ की सरल आवर्त होगी, जिसका आवर्तकाल T = `2pisqrt("y"/alpha)`; परन्तु समीकरण (1) से `("y"//alpha) = "h"/"g" => "T" = 2pisqrt(("h"/"g"))`
