मराठी

निम्नलिखित विषय पर दो से तीन सौ शब्दों में लेख लिखिए- झरोखे से बाहर

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित विषय पर दो से तीन सौ शब्दों में लेख लिखिए-

झरोखे से बाहर

लेखन कौशल्य
Advertisements

उत्तर

झरोखे से बाहर

सुबह का समय था। मैं अपने कमरे के झरोखे के पास बैठा बाहर का दृश्य देख रहा था। झरोखे से बाहर देखते ही ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया मेरे सामने खुल गई हो। ठंडी हवा के झोंके चेहरे को छू रहे थे और पेड़ों की पत्तियाँ धीरे-धीरे हिल रही थीं।

सड़क पर लोग अपने-अपने काम के लिए जा रहे थे। कोई साइकिल से जा रहा था तो कोई बस का इंतजार कर रहा था। कुछ बच्चे स्कूल की वर्दी में हँसते-बोलते हुए जा रहे थे। सड़क के किनारे एक चायवाला अपनी दुकान लगा रहा था। पास ही कुछ पक्षी दाना चुग रहे थे। प्रकृति और मनुष्य का यह मेल मुझे बहुत अच्छा लगा।

झरोखे से बाहर देखते हुए मुझे लगा कि जीवन भी इसी सड़क की तरह निरंतर चलता रहता है। कोई आगे बढ़ रहा है, कोई पीछे छूट रहा है, लेकिन जीवन कभी रुकता नहीं। बाहर की दुनिया में तरह-तरह के लोग हैं और हर व्यक्ति की अपनी अलग कहानी है।

कुछ देर बाद सूर्य की किरणें पेड़ों के बीच से झाँकने लगीं। वातावरण में नई ऊर्जा दिखाई देने लगी। मैंने महसूस किया कि केवल कमरे में बंद रहकर हम दुनिया को पूरी तरह नहीं समझ सकते। बाहर निकलकर प्रकृति, लोगों और जीवन को देखना भी आवश्यक है।

झरोखे से बाहर का छोटा-सा दृश्य मेरे लिए जीवन का एक बड़ा संदेश बन गया दुनिया बहुत सुंदर और विविध है, बस उसे देखने के लिए हमें अपने झरोखे से बाहर निकलना होगा।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 13: नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन - पाठ से संवाद [पृष्ठ १६२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Abhivyakti aur Madhyam Class 11 and 12
पाठ 13 नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
पाठ से संवाद | Q 2. i | पृष्ठ १६२
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Course
Use app×