मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: सोहत है चँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है। वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है।। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सोहत है चँदवा सिर मोर को, तैसिय सुंदर पाग कसी है।
वैसिय गोरज भाल बिराजत, जैसी हिये बनमाल लसी है।।
‘रसखान’ बिलोकत बौरी भई, दृग मूँदि कै ग्वालि पुकार हँसी है।
खोलि री घूँघट, खोलौं कहा, वह मूरति नैनिन माँझ बसी है।।

सेस, गनेस, महेस, दिनेस, सुरेसहु जाहि निरंतर गावैं।
जाहि अनादि, अनंत, अखंड, अछेद, अभेद, सुबेद बतावैं।।
नारद से सुक व्यास रटें, पचिहारे तऊ पुनि पार न पावैं।
ताहि अहिर की छोहरियाँ, छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं।।

  1. निम्नलिखित विधानों को पढक़र सही अथवा गलत लिखिए:  2
    1. कृष्ण के सिर पर स्वर्णमुकुट है।
    2. कृष्ण के हाथ पर वनमाला शोभायमान है।
    3. कवि रसखान की आँखों में कृष्ण की मूर्ति बसी है।
    4. नारद मुनि से लेकर शुक व्यास तक सभी प्रभु के नाम का निरंत जाप करते हैं।
  2. उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम दो पंक्तियों का 25 से 30 शब्दों में सरल अर्थ लिखिए।   2
आकलन
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उत्तर

    1. गलत 
    2. गलत 
    3. सही
    4. सही 
  1. कवि कहते हैं कि श्री कृष्ण के सिर पर मोरपंखों से बना चँदवा (मुकुट) अत्यंत सुशोभित हो रहा है और वैसी ही सुंदर पगड़ी उनके सिर पर बंधी है। उनके माथे पर गोधूलि (गायों की धूल) वैसे ही शोभा दे रही है, जैसे हृदय पर वनमाला सुशोभित है।
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