मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: फागुन के दिन चार होरी खेल मना रे। बिन करताल पखावज बाजै, अणहद की झनकार रे। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए: 

फागुन के दिन चार होरी खेल मना रे।
बिन करताल पखावज बाजै, अणहद की झनकार रे।
बिन सुर राग छतीसूँ गावै, रोम-रोम रणकार रे।।
सील संतोख की केसर घोली, प्रेम-प्रीत पिचकार रे।
उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग अपार रे।।
घट के पट सब खोल दिए हैं, लोकलाज सब डार रे।
‘मीरा’ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कँवल बलिहार रे।।
  1. एक शब्द में उत्तर लिखिए: 2
    1. फागुन के इतने दिन - ......
    2. आकाश इस रंग का हुआ - ......
    3. करताल पखावज के बिना निर्माण नाद - ......
    4. मीरा के प्रभु का नाम - ......
  2. पद्यांश में प्रयुक्त निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए: 2
    1. अंबर - ......
    2. कँवल - ......
    3. होरी - ......
    4. संतोखि - ......
  3. अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2

आकलन
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उत्तर

    1. फागुन के इतने दिन - चार
    2. आकाश इस रंग का हुआ - लाल
    3. करताल पखावज के बिना निर्माण नाद - अणहद
    4. मीरा के प्रभु का नाम - गिरिधर
    1. अंबर - आकाश
    2. कँवल - कमल
    3. होरी - होली
    4. संतोखि - संतोष
  1. मीरा कहती हैं कि उन्होंने अपने प्रिय कृष्ण के साथ होली खेलने के लिए शील और संतोष जैसे गुणों का केसरिया रंग तैयार किया है। उनका प्रेम ही होली की पिचकारी बन गया है। प्रेम के इस रंग से मानो पूरा आकाश लालिमा से भर गया है। अब उन्हें समाज की लाज या लोक-लज्जा का कोई भय नहीं रहा, इसलिए उन्होंने अपने हृदय के द्वार पूरी तरह खोल दिए हैं।अंत में मीरा कहती हैं कि उनके स्वामी वही भगवान कृष्ण हैं जिन्होंने गोवर्धन पर्वत उठाया था। उन्होंने अपने प्रभु के चरणों में अपना सब कुछ अर्पित कर दिया है और स्वयं को पूरी तरह उनके हवाले कर दिया है।

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