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प्रश्न
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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मैं घर से जूते पॉलिश करके आया था अतः मैंने उसे स्पष्ट मना कर दिया। वह दूसरे यात्री के पास जाकर विनय करने लगा। मैं उसी ओर देखने लगा। वह रह-रहकर यात्रियों से अनुनय-विनय कर रहा था−“बाबू जी, पॉलिश करा लो। जूते चमका दूँगा। अभी तक मेरी बोहनी नहीं हुई है।” मेरे पास ही एक सज्जन बैठे थे। वे भी उस लड़के को बड़े गौर से देख रहे थे। शायद उन्हें उसपर दया आई। उन्होंने उसे पुकारा तो वह प्रसन्न होकर उनके पास आया और वहीं बैठ गया। “बाबू जी, उतारो जूते।” उन्होंने कहा−“भाई, पॉलिश नहीं करानी है। ले, यह पाँच रुपये रख ले।” “क्यों बाबू जी?” उसने बड़े भोलेपन से कहा। वे सज्जन बड़े प्यार से बोले − “रख लें। तेरी बोहनी नहीं हुई है, इसलिए। ” लड़का झटके से खड़ा हुआ − “बाबू जी, भिखारी नहीं हूँ। मेहनत करके खाना चाहता हूँ। बिना पॉलिश किए रुपये क्यों लूँ?” यह कहते हुए वह आगे बढ़ गया। पॉलिश करने वाले लड़के के चेहरे पर स्वाभिमान का असाधारण तेज देखकर लोग दंग रह गए। |
- लिखिए: [2]
लड़के का स्वाभिमान व्यक्त करने वाले वाक्य- ...........................................
- ...........................................
- कारण लिखिए: [2]
- जूते पॉलिश करने के लिए लेखक का मना करना − .....................
- लड़के का यात्रियों से अनुनय विनय करना − .....................
- ‘परिश्रम से आनंद की प्राप्ती होती है’ इस विषय पर 30 से 40 शब्दों में अपने विचार लिखिए। [3]
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उत्तर
- “बाबू जी, भिखारी नहीं हूँ। मेहनत करके खाना चाहता हूँ।”
- “बिना पॉलिश किए रुपये क्यों लूँ?”
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- जूते पॉलिश करने के लिए लेखक का मना करना – लेखक ने जूते पहले ही साफ कर रखे थे।
- लड़के का यात्रियों से अनुनय-विनय करना – अपनी रोज़ी कमाने और मेहनत से पैसे प्राप्त करने के लिए।
- परिश्रम से सच्चा आनंद और संतोष मिलता है। जो व्यक्ति मेहनत से काम करता है, उसे आत्मसम्मान और सफलता दोनों प्राप्त होते हैं। बिना मेहनत के मिली वस्तु में वह सुख नहीं होता जो अपने श्रम से अर्जित करने में मिलता है।
