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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
नए और अप्रत्याशित विषयों के लेखन के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें - "इस तरह का लेखन खुले मैदान की तरह होता है, जिसमें बेलाग दौड़ने, कूदने और कुलाँचे भरने की छूट होती है।"
थोडक्यात उत्तर
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उत्तर
- नए और अप्रत्याशित विषयों के लेखन के संदर्भ में कहा जा सकता है कि लिखने का कोई फॉर्मूला आज तक दुनिया में नहीं बना है।
- जिस तरह के विषय दिए जा सकते हैं, वे हो सकते हैं :- आपके सामने की दीवार, उस दीवार पर टंगी घड़ी, उस दीवार में बाहर की ओर खुलता झरोखा आदि इत्यादि।
- अर्थात लेखन के लिए लेखक के पास विषय, सिद्धांत आदि की कोई सीमा नहीं होती है।
- लेखक की कल्पना, यथार्थ, आदर्श पर कोई बंधन नहीं होता है।
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नए अप्रत्याशित विषयों पर लेखन
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन के संदर्भ में 'मैं' शैली के प्रयोग के बारे में क्या मान्यता है?
