Advertisements
Advertisements
प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़िए और उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए:
|
लेकिन विघ्न अनेक अभी न्यायोचित सुख सुलभ नहीं स्वर्ग बना सकते हैं - रामधारी सिंह ‘दिनकर’ Swarg Bana Sakte Hain - Ramdhari Singh ‘Dinkar’ |
- इस कविता में ‘धर्मराज’ कहकर किसे संबोधित किया गया है तथा धर्मराज को यह संदेश कौन दे रहा है? [2]
- कवि के अनुसार मनुष्य का जीवन कैसा होना चाहिए? कविता के आधार पर बताइए। [2]
- मानव जीवन के विकास में कौन-कौन सी बाधाएँ और आशंकाएँ उपस्थित हैं? ये बाधाएँ और आशंकाएँ कैसे दूर हो सकती है? [3]
- ‘भव’ शब्द का अर्थ लिखकर कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए। [3]
आकलन
Advertisements
उत्तर
- इस कविता में युधिष्ठिर को ‘धर्मराज’ कहकर संबोधित किया गया है और धर्मराज को यह उपदेश भीष्म पितामह द्वारा दिया जा रहा है।
- कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के अनुसार मानव जीवन संघर्षों से भरा होता है, फिर भी मनुष्य को मानवता, न्याय और शांति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। वे मानते हैं कि मानवता के मार्ग में आने वाली बाधाएँ पर्वतों के समान कठोर होती हैं, किंतु उन्हें पार किए बिना सच्ची शांति संभव नहीं है।
- दिनकर जी यह संदेश देते हैं कि मानवता के मार्ग में अनेक कठिनाइयाँ आती हैं, पर यदि हम न्याय, समानता, प्रेम और शांति को अपनाएँ, तो इस धरती को स्वर्ग समान बनाया जा सकता है। सच्ची मानवता तभी स्थापित होगी जब प्रत्येक व्यक्ति को उसके उचित अधिकार मिलेंगे और समाज से भेदभाव व अन्याय समाप्त होगा।
- ‘भव’ शब्द का अर्थ संसार है। भीष्म पितामह युधिष्ठिर से कहते हैं कि जब तक धरती पर रहने वाले मनुष्यों को न्याय के अनुसार सुख-सुविधाएँ प्राप्त नहीं होतीं, तब तक वे चैन से नहीं बैठ सकते। यदि मनुष्य का मन अशांत रहेगा, तो धरती पर शांति की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए आवश्यक है कि समाज के सभी लोगों को समान रूप से न्याय और विकास के अवसर तथा सुख-सुविधाएँ प्राप्त हों।
shaalaa.com
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
