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प्रश्न
निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:
गेहूँ - गीला - होना - ______ - ______ - ______
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उत्तर
गेहूँ - गीला - होना - आटा गीला होना।
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संबंधित प्रश्न
नीचे दिए गए वाक्य पढ़िए तथा ‘और’ शब्द के विभिन्न प्रयोगों पर ध्यान दीजिए-
(क) पास में सुंदर और शक्तिशाली युवक रहा करता था। (दो पदों को जोड़ना)
(ख) वह कुछ और सोचने लगी। (‘अन्य’ के अर्थ में)
(ग) एक आकृति कुछ साफ़ हुई… कुछ और… कुछ और… (क्रमशः धीरे-धीरे के अर्थ में)
(घ) अचानक वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ गई। (दो उपवाक्यों को जोड़ने के अर्थ में)
(ङ) वामीरो का दुख उसे और गहरा कर रहा था। (‘अधिकता’ के अर्थ में)
(च) उसने थोड़ा और करीब जाकर पहचानने की चेष्टा की। (‘निकटता’ के अर्थ में)
निम्न शब्द का लिंग पहचानकर लिखो
नोट
शरीर के विभिन्न अंगों से संबंधित मुहावरों की अर्थ सहित सूची बनाओ।
निम्नलिखित समोच्चारित भिन्नार्थक हिंदी शब्द का अर्थ लिखो तथा उन शब्द का अलग-अलग पूर्ण वाक्यों में प्रयोग कराे :
हार
निम्न वृत्त में दिए संज्ञा तथा विशेषण शब्दों को छाँटकर तालिका में उचित स्थानों पर उनके भेद सहित लिखो :
- नदी
- पहाड़ी
- सीता
- वह लकड़हारा
- पानी
- चार किलो
- गरीबी
- ईमानदारी
- गंगा
- पालक
- दस
- चाँदी
- कोई
- सभा
- धनी
| संज्ञा | भेद | विशेषण | भेद |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ | ______ |
पाठ में प्रयुक्त उद्धरण, सुवचन, मुहावरे, कहावतें, आलंकारिक शब्द आदि की सूची बनाकर अपने लेखन प्रयोग हेतु संकलन करो।
शब्द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्य लिखिए:
पैसों का अपव्यय नहीं करना चाहिए।
रेखांकित शब्द से उपसर्ग और प्रत्यय अलग करके लिखिए:
पूर्णिमा के दिन चाँद परिपूर्णता लिए हुए था।
शब्द-युग्म पूरे करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए:
भूख
नीचे दिए गए चिन्ह के सामने उनका नाम लिखिए तथा वाक्य में उचित विरामचिह्न लगाइए
;
निम्न वाक्य में कारक रेखांकित कर उनके नाम और चिह्न लिखकर पाठ से अन्य वाक्य खोजकर लिखिए:
श्रीमती भटनागर ने दरवाजे पर फिर से वैसे ही गाड़ी के पहियों के निशान देखे।
निम्नलिखित अशुद्ध वाक्य को शुद्ध करके फिर से लिखिए:
आओ सिंहासन में बैठो।
निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:
टोपी - पहनना - ______ - ______
निम्नलिखित वर्णों से समानार्थी और विरुद्धार्थी शब्दों की जोड़ियाँ ढूँढ़ो और अपने वाक्यों में प्रयोग करके कॉपी में लिखो:

दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

__________________
__________________
दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:
__________________
__________________
चित्र देखकर संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया इन शब्द के भेदों के आधार पर उचित वाक्य बनाओ और तालिका में शब्द लिखाे:
| संज्ञा शब्द | सर्वनाम शब्द | विशेषण शब्द | क्रिया शब्द |
सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध, विनती के वाक्य विरामचिह्न सहित पढ़ो और समझो :
अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
‘खेलना’ इस क्रिया के सकर्मक, अकर्मक, संयुक्त, सहायक और प्रेरणार्थक रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो और लिखो।
अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-
वहाँ कोई लगभग एक दर्जन सेब रहे होंगे।
शब्द के वचन पहचान कर परिवर्तन कीजिए एवं अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए:-
ऋचा
शब्द बनाइए, विग्रह कीजिए तथा विलोम शब्द लिखिए:-
| विग्रह | शब्द | विलोम |
| + | अनुज | × |
शब्द पहेली से मुहावरे, कहावतें ढूँढ़िए। उनकी सूची बनाइए और अर्थ बताकर उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए:-
| आँखों से | ईंट का | कमर | डूबते | हाथ | अँधेरा | होगा |
| ओखली में | ऊँट के | तोड़ना | तारा | तले | जवाब | चार |
| छाती | ओझल | को | जीरा | देना | निकालना | पत्थर से |
| चिराग | तिनके का | सहारा | होना | आरसी | मुँह में | देना |
| आँखों का | क्या | मात | कंगन को | सिर | देना | कलेजा |
| लालच | कचूमर | हाथ | आना | फुलाना | मुँह को | चाँद |
| जड़ से | बुरी | मलना | उखाड़ | बला | लगाना | देना |
| मुहावरे | कहावतें |
परिच्छेद पढ़िए और उसमें आए शब्दों के लिंग एवं वचन बदलकर लिखिए।
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मैं गाँव से शहर पढ़ने आता था। गाँव का मेरा एक मित्र भी था। सावन-भादों की बादलों से ढँकी रात में बीहड़ पानी बरसता है। पूरा सन्नाटा शेर की दहाड़ सरीखा गरज उठता है। छमाक से बिजलियाँ कड़कती हैं। माँ बच्चे को अपने छाती से चिपकाती है। हाँड़ी में उबलते दाल-भात के साथ उसकी उम्मीद भी पकती है। उसका श्रम पकता है। अंत में कभी-कभी माँ हाँड़ी में चिपके मुट्ठी भर बचे चावल खाती है। न जाने कहाँ से अपनी आँखों में इतनी तेज चमक पैदा कर लेती है कि भरे पेटवाले की आँखें चौंधियाँ जाती हैं। उसके त्याग और संतान की तृप्ति के पानी से उसकी साध लहलहाती है। बैलगाड़ी में बैठी संतान को छतरी की छाँव करती है। बस में बच्चा खिड़की के पास बैठा बाहर दृश्यों को देखता है और वह पूरी यात्रा बच्चे को देखती रहती है। सँभालती रहती है। रेल जब बोगदे के भीतर से गुजरती है, तो अनायास उसका हाथ बच्चे की बाँह पर चला जाता है और पिता का सामान पर। |
इस निबंध के अंश पढ़कर विदेशी, तत्सम, तद्भव शब्द समझिए। इसी प्रकार के अन्य पाँच-पाँच शब्द ढूँढ़िए।
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कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है। हिंदी में कुछ शब्द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं। शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है। हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा। तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे। |
रेखांकित शब्द के विलोम शब्द लिखकर नए वाक्य बनाइए।
साेच समझकर व्यय करना चाहिए ।
निम्नलिखित मुहावरा, कहावत में गलत शब्द के स्थान पर सही शब्द लिखकर उन्हें पुनः लिखिए:
कमर का हार
अर्थ की दृष्टि से वाक्य परिवर्तित करके लिखिए :

