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प्रश्न
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे।
टीपा लिहा
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उत्तर
तब तौ छबि पीवत जीवत हे, अब सोचन लोचन जात जरे। – प्रस्तुत पंक्ति का आशय है कि संयोगावस्था में होने के कारण प्रेयसी कवि के पास ही थी। अतः उसे देखकर ही वह सुख पाता था और उसके रूप को देखकर आनंद से भर जाता था। यही उसके जीने का कारण भी था। परन्तु अब वियोग की अवस्था है। उसके नेत्र पुरानी स्थिति के बारे में सोच-सोचकर जलने लगते हैं। अर्थात कवि के नयनों में अब भी अपनी प्रेयसी से मिलन की आस बंधी हुई है।
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सवैया
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
