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प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:
| कुछ दिन बाद एक सुंदर नवयुवक साधु आगरे के बाजारों में गाता हुआ जा रहा था। लोगों ने समझा, इसकी भी मौत आ गई है। वे उठे कि उसे नगर की रीति की सूचना दे दें, मगर निकट पहुँचने से पहले ही मुग्ध होकर अपने-आपको भूल गए और किसी को साहस न हुआ कि उससे कुछ कहे। दम-के-दम में यह समाचार नगर में जंगल की आग के समान फैल गया कि एक साधु रागी आया है, जो बाजारों में गा रहा है। सिपाहियों ने हथकड़ियाँ सँभालीं और पकड़ने के लिए साधु की ओर दौड़े परंतु पास आना था कि रंग पलट गया। साधु के मुखमंडल से तेज की किरणें फूट रही थीं, जिनमें जादू था, मोहिनी थी और मुग्ध करने की शक्ति थी। सिपाहियों को न अपनी सुध रही, न हथकड़ियों की, न अपने बल की, न अपने कर्तव्य की, न बादशाह की, न बादशाह के हुक्म की। वे आश्चर्य से उसके मुख की ओर देखने लगे, जहाँ सरस्वती का वास था और जहाँ से संगीत की मधुर ध्वनि की धारा बह रही थी। साधु मस्त था, सुनने वाले मस्त थे। जमीन-आसमान मस्त थे। गाते-गाते साधु धीरे-धीरे चलता जाता था और श्रोताओं का समूह भी धीरे-धीरे चलता जाता था। ऐसा मालूम होता था, जैसे एक समुद्र है जिसे नवयुवक साधु आवाजों की जंजीरों से खींच रहा है और संकेत से अपने साथ-साथ आने की प्रेरणा कर रहा है। |
- संजाल पूर्ण कीजिए: [2]

- उपयुक्त गद्यांश में आए हुए शब्दयुग्म ढूँढ़कर लिखिए: [2]
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- ‘सच्चा कलाकार वह होता है जो दूसरों की कला का सम्मान करता है,’ इस कथन पर अपना मत ४० से ५० शब्दों में लिखिए। [2]
आकलन
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उत्तर
1. 
2.
- जमीन-आसमान
- तंत्र-मंत्र
- दिन-रात
- धीरे-धीरे
3. मेरे मत में सच्चा कलाकार वही है जो दूसरों की कला का सम्मान करता है। कला में अहंकार का स्थान नहीं होता। जो कलाकार दूसरों की प्रतिभा की सराहना करता है, वही स्वयं भी आगे बढ़ता है। सम्मान से प्रेम और सहयोग की भावना विकसित होती है, जिससे कला का स्तर ऊँचा होता है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
