मराठी

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। यह पूछा गया कि तू क्या करेगा। बालक ने सीखा सिखाया उत्तर दिया कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा। सभा 'वाह-वाह' करती सुन रही थी, - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

यह पूछा गया कि तू क्या करेगा। बालक ने सीखा सिखाया उत्तर दिया कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा। सभा 'वाह-वाह' करती सुन रही थी, पिता का हृदय उल्लास से भर रहा था। एक वृद्ध महाशय ने उसके सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जो तू इनाम माँगे वही दें। बालक कुछ सोचने लगा। पिता और अध्यापक इस चिंता में लगे कि देखें यह पढ़ाई का पुतला कौन-सी पुस्तक माँगता है। बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्‌डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था।
स्पष्ट करा
Advertisements

उत्तर

संदर्भ:

यह गद्यांश प्रसिद्ध हिंदी लेखक सियारामशरण गुप्त की रचना 'माँ' से लिया गया है। इसमें बाल मनोविज्ञान और समाज द्वारा बच्चों से की जाने वाली आदर्शवादी अपेक्षाओं का मार्मिक चित्रण किया गया है।

प्रसंग:

इस संदर्भ में एक बच्चे से पूछा जाता है कि वह जीवन में क्या करना चाहता है। बच्चा याद किया हुआ उत्तर देता है कि वह जीवन भर लोगों की सेवा करेगा, जिससे उसे सभा में प्रशंसा मिलती है और उसके पिता गर्व से भर जाते हैं। लेकिन जब उसे अपनी पसंद की कोई चीज चुनने का अवसर दिया जाता है, तो उसकी स्वाभाविक और सहज इच्छा सामने आ जाती है।

व्याख्या:

यह गद्यांश दर्शाता है कि बालक पर समाज और परिवार की आदर्शवादी अपेक्षाओं का भारी दबाव होता है। उसने रटा-रटाया उत्तर दिया कि वह जीवनभर लोकसेवा करेगा, लेकिन उसकी स्वाभाविक इच्छाएँ मन में जीवित थीं। इनाम माँगने पर उसने 'लड्डू' की इच्छा जताई, जिससे पिता और अध्यापक निराश हुए, क्योंकि वे उम्मीद कर रहे थे कि वह कोई पुस्तक या बड़ी चीज़ माँगेगा। लेखक बताते हैं कि बच्चों की प्राकृतिक प्रवृत्तियों को दबाने से उनका विकास रुक जाता है। अंततः बालक की सहजता की जीत होती है, और लेखक राहत महसूस करते हैं, क्योंकि बालक ने अपने मन की बात कह दी।

विशेष:

इस गद्यांश की विशेषता यह है कि यह बाल मनोविज्ञान और बच्चों की स्वतंत्रता के महत्व को सरल तरीके से दर्शाता है। लेखक यह संदेश देता है कि बच्चों को उनकी स्वाभाविक इच्छाओं के साथ जीने दिया जाना चाहिए, और उन पर आदर्शवादी दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।

shaalaa.com
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
2024-2025 (March) Board Sample Paper
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×