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निम्नलिखित अभिक्रिया के समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा संतुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए- - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

निम्नलिखित अभिक्रिया के समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा संतुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए-

\[\ce{Cl2O7(g) + H2O2(aq) -> ClO^-_2(aq) + O2(g) + H+(aq)}\]

दीर्घउत्तर
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उत्तर

आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण संतुलित करना-

पद 1. पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-

\[\ce{Cl2O7(g) + H2O2(aq) -> ClO^-_2(aq) + O2(g) + H+(aq)}\]

पद 2. दो अर्द्ध अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-

(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{H2\overset{-1}{O2}(aq) -> \overset{0}{O2}(g)}\]

(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{\overset{+7}{Cl2}O7(g) -> \overset{+3}{Cl}{O}^-_2(aq)}\]

(H2O2 अपचायक तथा \[\ce{Cl2O7}\] ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है।)

पद 3. ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में H परमाणुओं के संतुलन के लिए हम दो H+ दाईं ओर जोड़ते हैं -

\[\ce{H2O2(aq) -> O2(g) + 2H+(aq)}\]

चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में संपन्न होती है; अतः दोनों ओर OH- आयन जोड़ने पर -

\[\ce{2OH-(aq) + H2O2 -> O2(g) + 2H+(aq) + 2OH-(aq)}\]

H+ तथा OH- आयन के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामी समीकरण निम्नवत होगी- 

\[\ce{H2O2(aq) + 2OH-(aq) -> O2(g) + 2H2O(l)}\]

पद 4. अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में सर्वप्रथम Cl परमाणुओं को संतुलित करते है-

\[\ce{Cl2O7(g) -> 2ClO^-_2(aq) }\]

O परमाणुओं के संतुलन के लिए हम दाईं ओर तीन जल-अणु जोड़ते है-

\[\ce{Cl2O7(g) -> 2ClO^-_2(aq) + 3H2O(l)}\]

H परमाणुओं के संतुलन के लिए हम 6H+ बाईं ओर जोड़ते है-

\[\ce{Cl2O7(g) + 6H+(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 3H2O(l)}\]

चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में संपन्न होती है; अतः 6H+ लिए के दोनों ओर 6OH- जोड़ते है-

\[\ce{Cl2O7(g) + 6H+(aq) + 6OH-(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 3H2O(l) + 6OH-(aq)}\]

H+ तथा OH- के संयोग से जल अणु बनने पर परिणामु समिकरा निम्नवत होगी-

\[\ce{Cl2O7(g) + 3H2O(l) -> 2ClO^-_2(aq) + 3H2O(l) + 6OH-(aq)}\]

पद 5. इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का संतुलन निम्नवत करते है-

\[\ce{H2O2(aq) + 2OH-(aq) -> O2(g) + 2H2O(l) + 2e-}\]

\[\ce{Cl2O7(g) + 3H2O(l) + 8e- -> 2ClO^-_2(aq) + 6OH-(aq)}\]

इलेक्ट्रॉन की संख्या एकसमान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध -अभिक्रिया की गुना 4 से करते है।

\[\ce{4H2O2(aq) + 8OH-(aq) -> 4O2(g) + 8H2O(l) + 8e-}\]

\[\ce{Cl2O7(g) + 3H2O(l) + 8e- -> 2ClO^-_2(aq) + 6OH-(aq)}\]

पद 6. उपर्युक्त दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर - 

\[\ce{Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH-(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 4O2(g) + 5H2O(l)}\]

अंतिम सत्यापन यह दर्शाता है की समीकरण में दोनों ओर के परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दॄष्टि से समीकरण संतुलित है।

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण संतुलित करना-

पद 1. अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार है-

\[\ce{Cl2O7(g) + H2O2(aq) -> ClO^-_2(aq) + O2(g) + H+(aq)}\]

पद 2. अभिक्रिया में Cl तथा O की ऑक्सीकरण संख्या लिखते है-

\[\ce{\overset{+7}{Cl2}O6(g) + H2\overset{-1}{O2}(aq) -> \overset{+3}{Cl}O^-_2(aq) +\overset{0}{O2}(g) + H+(aq)}\]

स्पष्ट है की H2O2अपचायक तथा Cl2O7 ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते है।

पद 3. ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली कमी तथा वृद्धि की गणना करते है तथा इन्हे एकसमान बनाते है- 

\[\ce{Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 4O2(g)}\]

पद 4. चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में संपन्न होती है तथा दोनों ओर के आयनों का आवेश एकसमान नहीं है; अतः हम दो OH- आयन बाईं और जोड़ देते है-

\[\ce{Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH-(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 4O2(g)}\]

H परमाणुओं के संतुलन के लिए दाईं ओर पॉंच जल-अणु जोड़ते है।

\[\ce{Cl2O7(g) + 4H2O2(aq) + 2OH-(aq) -> 2ClO^-_2(aq) + 4O2(g) + 5H2O(l)}\]

यह संतुलित समीकरण है।

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ऑक्सीकरण-संख्या - अपचयोपचय अभिक्रियाओं का संतुलन
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