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निम्नलिखित अभिक्रिया के समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा संतुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए- - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

निम्नलिखित अभिक्रिया के समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन तथा ऑक्सीकरण संख्या विधि (क्षारीय माध्यम में) द्वारा संतुलित कीजिए तथा इनमें ऑक्सीकारक और अपचायकों की पहचान कीजिए-

\[\ce{N2H4(l) + CIO^-_3(aq) -> NO(g) + CI^-(g)}\]

दीर्घउत्तर
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उत्तर

आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण संतुलित करना-

पद 1: पहले ढाँचा समीकरण लिखते हैं-

\[\ce{N2H4(l) + CIO^-_3(aq) -> NO(g) + CI^-(g)}\]

पद 2: दो अर्द्ध अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-

(i) ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{\overset{-2}{N2}H4(l) -> \overset{+2}{N}O(g)}\]

(ii) अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया: \[\ce{CI\overset{+5}{O}^-_3(aq) -> \overset{-1}{C}I^-(g)}\]

(N2H4) अपचायक तथा \[\ce{CIO^-_3}\] ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है।)

पद 3: ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया में N- परमाणुओं को संतुलित करते है -

\[\ce{N2H4(l) -> 2NO(g)}\]

अब O परमाणुओं को संतुलित करने के लिए समीकरण में बाईं ओर दो जल अणु जोड़ते है- 

\[\ce{N2H4(l)  + 2H2O(l) -> 2NO(g)}\]

अब H परमाणुओं को संतुलित करने के लिए समीकरण में दाईं ओर 8H+ जोड़ते है- 

\[\ce{N2H4(l)  + 2H2O(l) -> 2NO(g) + 8H+(aq)}\]

चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है; अतः समीकरण के दोनों ओर 8OH- आयन जोड़ते है-

\[\ce{N2H4(l)  + 2H2O(l) + 8OH^-(aq) -> 2NO(g) + 8H+(aq) + 8OH^-(aq)}\]

H+ तथा OH- आयनों के संयोग पर जल अणु बनने के कारण समीकरण निम्नवत होगी-

\[\ce{N2H4(l) 8OH^-(aq) -> 2NO(g) + 6H2O(l)}\]

पद 4: अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में O परमाणुओं के संतुलन के लिए समीकरण के दाईं ओर तीन जल अणु जोड़ते है- 

\[\ce{CIO^-_3(aq) -> CI^-(g) + 3H2O(l)}\]

चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में होती है; अतः समीकरण में दोनों और छह OH- आयन जोड़ते है- 

\[\ce{CIO^-_3(aq) + 6H+(aq) + 6OH-(aq) -> CI-(g) + 3H2O(l) + 6OH-}\]

H+ तथा OH- के संयोग से जल अणु बनने पर,

\[\ce{CIO^-_3(aq) + 3H2O(l) -> CI-(g) + 6OH-(aq)}\]

पद 5:  इस पद में हम दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में आवेश का संतुलन निम्नवत करते हैं-

\[\ce{N2H4(l) + 8OH-(aq) -> 2NO(g) + 6H2O(l) + 8e-}\]

\[\ce{CIO^-_3(aq) + 3H2O(l)  + 6e^--> CI-(g) + 6OH-(aq)}\]

इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान करने के लिए ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया को 3 से तथा अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया को 4 से गुना करते है-

\[\ce{3N2H4(l) + 24OH-(aq) -> 6NO(g) + 18H2O(l) + 24e-}\]

\[\ce{4CIO^-_3(aq) + 12H2O(l)  + 24e^--> 4CI-(g) + 24OH-(aq)}\]

पद 6: दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर-

\[\ce{3N2H4(l) + 4CIO^-_3(aq)->  6NO(g) + 4CI^-(g) + 6H2O(l)}\]

अंतिम सत्यापन दर्शाता है की उपर्युक्त समीकरण परमाणुओं की संख्या तथा आवेश की दृष्टि से संतुलित है।

ऑक्सीकरण संख्या विधि से समीकरण संतुलित करना-

पद 1: अभिक्रिया का ढाँचा इस प्रकार हैं-

\[\ce{N2H4(l) + CIO^-_3(aq) -> NO(g) + CI^-(g)}\]

पद 2: अभिक्रिया में N तथा CI की ऑक्सीकरण संख्या लिखते है-

\[\ce{\overset{-2}{N2}H4(l) + CI\overset{+5}{O}^-_3(aq) -> N\overset{+2}{O}(g) + C\overset{-1}{I}^-(g)}\]

स्पष्ट है की N2H4 अपचायक तथा \[\ce{CIO^-_3}\] ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करते है।

पद 3: ऑक्सीकरण संख्या में होने वाली वृद्धि तथा कमी की गणना करते है तथा इन्हें एकसमान बनाते है।

\[\ce{3N2H4(l) + 4CIO^-_3(aq) -> 6NO(g) + 4CI^-(g)}\]

पद 4: चूँकि अभिक्रिया क्षारीय माध्यम में हो रही है तथा अभिक्रिया आवेश की दृष्टि से संतुलित है; अतः O तथा H परमाणुओं के संतुलन के लिए अभिक्रिया में दाईं ओर 6 जल अणु जोड़ देने पर पूर्णतया संतुलित समीकरण प्राप्त हो जाएगी।

\[\ce{3N2H4(l) + 4CIO^-_3(aq) -> 6NO(g) + 4CI^-(g) + 6H2O(l)}\]

यह संतुलित समीकरण है।

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