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महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता ९ वी

‘नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ इसे अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए। - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

‘नाश के दुख से कभी दबता नहीं निर्माण का सुख’ इसे अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

थोडक्यात उत्तर
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उत्तर

जीवन में अनेक बार ऐसे ठहराव और बाधा का सामना हमें करना पड़ता है कि हमें लगता है कि अब आगे बढ़ना संभव नहीं है, लेकिन इंसान हिम्मत संजोकर फिर आगे बढ़ता है और बढ़ता चला जाता है। मानव जीवन में उतार-चढ़ाव चलता रहता है। आदमी को दुखों से घबराना नहीं चाहिए। उसे डटकर मुश्किलों का सामना करना चाहिए। त्सुनामी, भूकंप, बाढ़ तथा सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं। मनुष्य का सब कुछ नष्ट हो जाता है। नष्ट हो जाने पर व्यक्ति को दुख तो होता है, किंतु सृजन का सुख तो कुछ और ही होता है। मानव को नाश पर निर्माण को वरीयता देनी चाहिए।

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दिवस का अवसान
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पाठ 1.11: दिवस का अवसान - स्वाध्याय [पृष्ठ ४७]

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बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
पाठ 1.11 दिवस का अवसान
स्वाध्याय | Q १ | पृष्ठ ४७
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