मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

मोथी घास और पटरे की रंगीन शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए मूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, हलवाहों के लिए ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी तथा इसी तरह के बहुत-से काम हैं जिन्हें सिरचन के सिवा गाँव में और कोई नहीं जानता। यह दूसरी बात है कि अब गाँव में ऐसे कामों को बेकाम का काम समझते हैं लोग। बेकाम का काम जिसकी मजदूरी में अनाज या पैसे देने की कोई जरूरत नहीं। पेट भर खिला दो, काम पूरा होने पर एकाध पुराना-धुराना कपड़ा देकर विदा करो। वह कुछ भी नहीं बोलेगा।...

कुछ भी नहीं बोलेगा; ऐसी बात नहीं, सिरचन को बुलाने वाले जानते हैं, सिरचन बात करने में भी कारगर है।

  1. आकलन
    उचित जोड़ियाँ मिलाइए:     [2]   

    'अ' 'आ' 
    (i) बाँस की तीलियाँ शीतलपाटी
    (ii) सतरंगी डोर बड़े-बड़े जाले
    (iii) मूँज की रस्सी  मोढ़े
    (iv) ताल के सूखे पत्ते  झिलमिलाती चिक
      छतरीटोपी
  2. अभिव्यक्ति:
    लुप्त होने वाली कारीगरी को प्रोत्साहित करने के उपाय 25 से 30 शब्दों में लिखिए।       [2] 
आकलन
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उत्तर

  1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए:
    'अ' 'आ' 
    (i) बाँस की तीलियाँ झिलमिलाती चिक
    (ii) सतरंगी डोर मोढ़े
    (iii) मूँज की रस्सी  बड़े-बड़े जाले
    (iv) ताल के सूखे पत्ते  छतरी टोपी
  2. हमारे देश में प्राचीन समय से ही विभिन्न प्रकार की कारीगरी प्रचलित रही है, लेकिन अब इनकी स्थिति धीरे-धीरे लुप्त होने की ओर बढ़ रही है। इसलिए इन पारंपरिक कलाओं को संरक्षित और बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि इन्हें सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर आर्थिक सहायता मिले, कारीगरों द्वारा बनाई गई वस्तुओं की बिक्री के लिए उचित व्यवस्था हो और इन्हें लघु उद्योग के रूप में देशभर में विकसित किया जाए। साथ ही, इन कलाओं से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। किसी भी योजना की सफलता के लिए प्रचार का सहारा ज़रूरी होता है, इसलिए मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से इन कलाओं और उत्पादों को जनता के सामने लाना चाहिए। इन उपायों से लुप्त होती कारीगरी को नया जीवन दिया जा सकता है।
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