मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

बीत गया हेमंत भ्रात, शिशिर ऋतु आई! प्रकृति हुई द्युतिहीन, अवनि में कुंझटिका है छाई। पड़ता खूब तुषार पद्मदल तालों में बिलखाते, अन्यायी नृप के दंडों से यथा लोग दुख पाते।

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प्रश्न

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

बीत गया हेमंत भ्रात, शिशिर ऋतु आई!

प्रकृति हुई द्युतिहीन, अवनि में कुंझटिका है छाई।

पड़ता खूब तुषार पद्मदल तालों में बिलखाते,

अन्यायी नृप के दंडों से यथा लोग दुख पाते।

निशा काल में लोग घरों में निज-निज जा सोते हैं,

बाहर श्वान, स्यार चिल्लाकर बार-बार रोते हैं।

अद्र्धरात्रि को घर से कोई जो आँगन को आता,

शून्य गगन मंडल को लख यह मन में है भय पाता।

तारे निपट मलीन चंद ने पांडुवर्ण है पाया,

मानो किसी राज्य पर है, राष्ट्रीय कष्ट कुछ आया।

  1. आकलन
    कृति पूर्ण कीजिए:      [2]

    शिशिर ऋतु में इनमें हुए परिवर्तन
    (i) प्रकृति ------------
    (ii) तारे ------------
    (iii) श्वान-सियार ------------
    (iv) चंद ------------
  2. शब्द संपदा:   
    1. पद्यांश से शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए:     [1]
      1. ------------
      2. ------------
    2. निम्नलिखित शब्दों से प्रत्यय अलग करके लिखिए:     [1]
      1. राष्ट्रीय − -------------
      2. अन्यायी − ------------
  3. सरल अर्थ    [2]
    उपर्युक्त पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
आकलन
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उत्तर

  1. शिशिर ऋतु में इनमें हुए परिवर्तन
    (i) प्रकृति द्युतिहीन हुई
    (ii) तारे मलीन हुए
    (iii) श्वान-सियार चिल्लाकर रोए
    (iv) चंद पांडुवर्ण हुआ
      1. निज-निज
      2. बार-बार
      1. राष्ट्रीय − राष्ट्र → ईय
      2. अन्यायी − अन्याय → ईं
  2. कवि बताते हैं कि अब शिशिर ऋतु का आगमन हो चुका है और हेमंत ऋतु बीत गई है। शिशिर की कड़ाके की ठंड ने प्रकृति की सुंदरता को फीका कर दिया है और उसकी चमक खो गई है। चारों ओर धुंध छा गई है। 
    तेज़ ठंड के कारण बर्फ लगातार गिर रही है, जिससे तालाबों में खिले कमल के फूल पीड़ा झेल रहे हैं। कवि इस स्थिति की तुलना एक क्रूर और अन्यायी शासक से करते हैं, जिसकी कठोरता से उसकी प्रजा दुखी हो जाती है।

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