मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

माध्यमभाषया ससन्दर्भ स्पष्टीकुरुत। यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोष:।

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प्रश्न

माध्यमभाषया ससन्दर्भ स्पष्टीकुरुत।

यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोष:।

दीर्घउत्तर
लघु उत्तर
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उत्तर १

English:

This profound statement teaches us about the philosophy of action and effort. It conveys that human beings have control only over their sincere efforts, not always over the final outcome, which depends on various external factors or destiny. Therefore, if a person makes a dedicated, honest effort yet does not achieve success, they bear no blame or fault, because fulfilling one's duty with complete dedication is what truly matters.

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उत्तर २

हिंदी:

यह श्लोकांश हमें कर्म और पुरुषार्थ का महान संदेश देता है। इसका अर्थ है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, परिणाम पर नहीं। यदि कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और प्रयत्न के बावजूद सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है, तो इसमें उसका कोई दोष नहीं माना जाता है। महत्वपूर्ण यह है कि आपने प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ी, क्योंकि परिणाम अनेक अनिश्चित कारकों पर निर्भर करते हैं।

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उत्तर ३

मराठी:

हा सुविचार माणसाला कर्माचे महत्त्व आणि फळाची अपेक्षा न ठेवता प्रयत्न करण्याचे तत्त्वज्ञान शिकवतो. माणसाच्या हातात केवळ प्रामाणिक प्रयत्न करणे असते, यश किंवा अपयश नाही. जर एखाद्या व्यक्तीने पूर्ण निष्ठेने आणि कष्टाने प्रयत्न करूनही यश मिळाले नाही, तर त्यात त्या व्यक्तीचा काहीही दोष नसतो; कारण प्रामाणिक प्रयत्न करणे हेच माणसाचे खरे कर्तव्य आहे.

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पाठ 6: भावेन भाव:, क्रियया क्रिया। - भाषाभ्यासः। [पृष्ठ २८]

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बालभारती Sanskrit Aahlaad Standard 12 Maharashtra State Board
पाठ 6 भावेन भाव:, क्रियया क्रिया।
भाषाभ्यासः। | Q १. ३) | पृष्ठ २८
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