मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

माध्यमभाषया ससन्दर्भ स्पष्टीकुरुत। चित्तप्रसादे प्रथमं यतस्व।

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प्रश्न

माध्यमभाषया ससन्दर्भ स्पष्टीकुरुत।

चित्तप्रसादे प्रथमं यतस्व।

दीर्घउत्तर
लघु उत्तर
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उत्तर १

English:

This line emphasizes that if a person truly desires true happiness and peace, they must first make an earnest effort to keep their mind calm, pure, and cheerful. According to this philosophical thought, external circumstances do not dictate happiness as much as ones inner state of mind does. When the mind is joyful and tranquil, the entire world appears beautiful and pleasant; therefore, inner mental purification and cheerfulness should always be the primary goal.

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उत्तर २

हिंदी:

यह सुभाषित हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि यदि मनुष्य को वास्तविक सुख की अभिलाषा है, तो उसे सबसे पहले अपने मन को प्रसन्न और शांत रखने का प्रयास करना चाहिए। बाहरी दुनिया वैसी ही प्रतीत होती है जैसा हमारा अंतःकरण होता है। जब मन प्रसन्न होता है, तो संपूर्ण संसार आनंदमय लगता है। अतः मानसिक प्रसन्नता ही सभी सुखों का मूल आधार है।

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उत्तर ३

मराठी:

हा सुभाषितपर विचार माणसाच्या मनाच्या स्थितीचे महत्त्व सांगतो. जर तुम्हाला आयुष्यात खऱ्या सुखाची इच्छा असेल, तर सर्वप्रथम आपले मन प्रसन्न, शांत आणि आनंदित ठेवण्यासाठी प्रयत्न केले पाहिजेत. आपले अंतःकरण जसे असते, तसेच हे जग आपल्याला भासते. मन प्रसन्न असले की संपूर्ण जग आनंदी आणि सुंदर वाटते, म्हणूनच मनाची प्रसन्नता हेच सर्व सुखप्राप्तीचे पहिले साधन आहे.

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पाठ 6: भावेन भाव:, क्रियया क्रिया। - भाषाभ्यासः। [पृष्ठ २८]

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बालभारती Sanskrit Aahlaad Standard 12 Maharashtra State Board
पाठ 6 भावेन भाव:, क्रियया क्रिया।
भाषाभ्यासः। | Q १. १) | पृष्ठ २८
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