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प्रश्न
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उत्तर
कवि एक अनासक्त योगी तथा विदग्ध प्रेमी की तरह होता है। वह अपने युग के समाज में रहते हुए भी समाज के आकर्षण और वैभव से प्रभावित नहीं होता। उसे सुख, भोग और ऐश्वर्य प्रिय नहीं होते, बल्कि वह इन सब आकर्षणों से दूर रहकर अपना जीवन व्यतीत करता है। वह समाज के संघर्ष, कोलाहल, उतार-चढ़ाव और कठिन परिस्थितियों से निरंतर संघर्ष करता रहता है। एक विदग्ध प्रेमी के समान वह समाज से हृदय में पीड़ा लेकर भी हमेशा उसके कल्याण के लिए कार्य करता है। सुख हो या दुख, वह किसी भी स्थिति में हार नहीं मानता और फक्कड़ स्वभाव से जीवन जीता है। जैसे संत कबीरदास जी समाज से अनासक्त रहकर विदग्ध प्रेमी की भाँति हृदय की पीड़ा सहते हुए समाज सुधार के लिए निरंतर कार्य करते रहे, उन्होंने अपने फक्कड़ स्वभाव से समाज की प्रतिकूल परिस्थितियों को भी बदलकर अनुकूल और स्वस्थ बना दिया। उसी प्रकार साहित्यकारों को भी होना चाहिए।
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आशय स्पष्ट कीजिए-
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आशय स्पष्ट कीजिए-
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आशय स्पष्ट कीजिए-
फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है। वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है। वह इशारा है।
कोमल और कठोर दोनों भाव किस प्रकार गांधीजी के व्यक्तित्व की विशेषता बन गए।
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अरिष्ठ वृक्ष- रीठा नामक वृक्ष। इसके पत्ते चमकीले हरे होते हैं। फल को सुखाकर उसके छिलके का चूर्ण बनाया जाता है, बाल धोने एवं कपड़े साफ करने के काम में आता है। पेड़ की डालियों व तने पर जगह-जगह काँटे उभरे होते हैं, जो बाल और कपड़े धोने के काम भी आता है।
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आरग्वध वृक्ष- लोक में उसे अमलतास कहा जाता है। भीषण गरमी की दशा में जब इसका पड़े पत्रहीन ठूँठ सा हो जाता है, पर इस पर पीले-पीले पुष्प गुच्छे लटके हुए मनोहर दृश्य उपस्थित करते हैं। इसके फल लगभग एक डेढ़ फुट के बेलनाकार होते हैं जिसमें कठोर बीज होते हैं।
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
शिरीष के फूल निबंध में अवधूत रूप के रूप में लेखक ने किस महात्मा को याद किया है और क्यों?
